भारत और दुनिया में अधिकांश मानव रेबीज़ के मामले कुत्तों से जुड़े होते हैं, लेकिन Rat के काटने को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। आमतौर पर रेबीज़ का खतरा कुत्तों, बिल्लियों या बंदरों से जुड़ा होता है, जबकि चूहों की स्थिति अलग है।
WHO और CDC के मुताबिक चूहे रेबीज़ वायरस के वाहक नहीं होते, इसलिए उनसे रेबीज़ होने की संभावना बेहद कम है। हालांकि, चूहे का काटना खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इससे रैट-बाइट फीवर, टेटनस और अन्य बैक्टीरियल इन्फेक्शन फैल सकते हैं।
चूहे के काटने से संभावित खतरे
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टेटनस
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रैट-बाइट फीवर (कभी-कभी जानलेवा)
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हैवरहिल बुखार (दूषित भोजन या तरल पदार्थ से)
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गंभीर उल्टी, गले में खराश, बुखार, सूजन, मवाद आदि
डॉक्टर से कब मिलें
चूहे के काटने के बाद हमेशा मेडिकल हेल्प लें। खासकर यदि घाव चेहरे या हाथों पर हो, संक्रमण के लक्षण हों (लालिमा, मवाद, सूजन, तेज बुखार, जोड़ों में दर्द)।
टीका कब जरूरी है?
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रेबीज़ टीका (Anti-rabies vaccine): सामान्य परिस्थितियों में चूहे के काटने पर ज़रूरी नहीं। केवल जंगल/वन क्षेत्रों के rodents के मामले में PEP पर विचार किया जाता है।
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टेटनस इंजेक्शन (TT): अगर पिछला टीका 5 साल से पहले हुआ है तो डॉक्टर आमतौर पर यह लेने की सलाह देते हैं।
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एंटीबायोटिक दवाएं: संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टर जरूरत पड़ने पर देते हैं।
निचोड़ यह है कि चूहों से रेबीज़ का खतरा लगभग न के बराबर है, लेकिन अन्य गंभीर संक्रमणों से बचने के लिए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।