वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सीढ़ियां बनाते समय दिशा, स्थान और बनावट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसमें सीढ़ियों की संख्या के बारे में कुछ आवश्यक नियम भी बताए जाते हैं। सीढ़ियों की संख्या भी बताई गई है।
सनातन धर्म के लोगों का मानना है कि वास्तु नियमों का पालन करके बनाया गया घर हमेशा खुश रहता है। यही कारण है कि घर बनाते समय वास्तु के हिसाब से छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखा जाता है। सीढ़ियों के लिए भी वास्तु में दिशा, स्थान और संख्या के नियम बताए गए हैं। यही कारण है कि सीढ़ियों की संख्या 5 से 8 तक या 11 से 14 तक रहती है। इसके लिए एक विशिष्ट गणित का उपयोग किया जाता है। यह वास्तु फॉर्मूला सीढ़ियों की संख्या से जुड़ा है।
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क्या इंद्र-यम-राज का नियम है?
वास्तु शास्त्र में इंद्र, यम और राज का क्रम सीढ़ियों की संख्या बताता है। गणना में शुभ संख्याएं वह हैं जो 3 से भाग देने पर 2 शेष रहता है। यही कारण है कि 5, 8, 11, 14, 17, 20, 23, 26 और 29 की संख्या बताई जाती है। मानसार ग्रंथ के अध्याय 30 और विश्वकर्मा प्रकाश ग्रंथ के अध्याय 54 में इस नियम और इससे जुड़ी व्याख्याओं का भी उल्लेख है।
राज, यम और इंद्र का अर्थ
इंद्र को वास्तुशास्त्र में धन और ऐश्वर्य से जोड़ा गया है। यम को क्षय और रुकावट से जोड़ा जाता है, जबकि राज को स्थिरता और सफलता से जोड़ा जाता है। इन्हीं तीन चरणों का क्रम सीढ़ियों की संख्या का आधार माना जाता है।
सीढ़ियों को गिनते समय ध्यान दें
सीढ़ियों की संख्या गिनते समय केवल पैरों के नीचे की सीढ़ियों को नहीं गिना जाता। गणना में एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाने वाले राइजर, यानी ऊंचाई वाले हिस्से शामिल हैं। इसमें लैंडिंग तक पहुंचाने वाला राइजर भी शामिल होता है।
क्या बीस सीढ़ियां अशुभ हैं?
सीढ़ियों की संख्या शून्य से कम नहीं होनी चाहिए (10, 20 या अधिक)। वास्तुशास्त्र कहता है कि शून्य पर खत्म होने वाली संख्या ऊर्जा प्रवाह में ठहराव से जुड़ी है। इससे घर के सदस्यों का विकास और सौभाग्य बाधित होता है। यही कारण है कि सीढ़ियों की संख्या निर्धारित करते समय इस नियम को भी ध्यान में रखें।