इसुदान गढ़वी: सरकार को हर बात की जानकारी है लेकिन वह कुछ देना नहीं चाहती।
आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष तथा जाने-माने किसान नेता इसुदान गढ़वी ने देवभूमि द्वारका के एक गांव में मूंगफली की फसल दिखाकर बताया था कि मूंगफली की फसल सूख गई है, सरकार को अभी भी ऐसा लगता हो कि “अगर शायद एक-दो इंच बारिश हो जाए और सूखा घोषित न करना पड़े” तो मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अब यह फसल बचने वाली नहीं है। हमने देवभूमि द्वारका के गांव-गांव जाकर सत्याग्रह का दूसरा भाग शुरू कर दिया है और सूखा घोषित करवाने के फॉर्म भरने के लिए किसानों की लाइन लग रही है। क्योंकि किसान बहुत ही पीड़ा में हैं। मूंगफली के पूरे खेत में मूंगफली का एक भी दाना नहीं है। किसानों, भागियाओं, पशुपालकों और खेत मजदूरों की हालत बहुत ही दयनीय हो गई है। अगर इस खेत से मूंगफली का एक भी दाना निकल जाए तो मैं गुजरात सरकार का गुलाम बनने के लिए तैयार हूं। मैं राजनीति नहीं करता बल्कि किसान का बेटा हूं और किसानों की स्थिति समझता हूं इसलिए यह बात कर रहा हूं। सरकार को सूखा घोषित करना पड़ेगा और करना ही पड़ेगा। आपको लगे तो तलाटी मंत्री, कलेक्टरों को गांव में उतारें और खुद खेतों की स्थिति चेक करवा लें।
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इसके अलावा किसान नेता इसुदान गढ़वी ने बताया था कि, सरकार तत्काल प्रभाव से सूखा घोषित करके किसानों को सहायता का भुगतान करे, ऐसी हमारी अपील है क्योंकि हम भीख नहीं मांग रहे हैं बल्कि किसानों का हक मांग रहे हैं। जब किसी कंपनी पर आपदा आती है तब आप लोन माफ करते हैं, टैक्स में राहत देते हैं, बिजली के बिल में राहत देते हैं। मैंने 58 विधायकों को पत्र लिखा था और जिन विधायकों ने किसानों के वोट से जीत हासिल की है, उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री को पत्र नहीं लिखा है और विधानसभा में भी मुद्दा नहीं उठाया है। मैं उन सभी से कहना चाहता हूं कि हम आपके नाम सार्वजनिक करेंगे और दोबारा कभी जनता आपको नहीं चुनेगी। किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। हम इसलिए कहते हैं कि फूल नहीं तो फूल की पंखुड़ी के समान किसानों को सहायता का भुगतान करें। जिन विधायकों ने पत्र नहीं लिखा है, उनसे कहना चाहता हूं कि आप पत्र लिखें क्योंकि आने वाले चुनाव में ये सभी मुद्दे उठेंगे कि कौन किसानों के साथ था और कौन नहीं। सरकार को हर बात की जानकारी है लेकिन वे कुछ देना नहीं चाहते। कृपया सूखा घोषित करें, सहायता का भुगतान करें, चारा दें और जो पानी छोड़ना बंद किया है उसे शुरू करें। आपदा के समय सरकार, नेता और अधिकारी बेनकाब हो गए हैं। क्योंकि उन लोगों की कोई नीयत ही नहीं है कुछ अच्छा करने की। एक बार फिर मेरी अपील है कि तत्काल प्रभाव से सूखा घोषित करें अन्यथा 2 अक्टूबर के बाद हम सत्याग्रह का तीसरा चरण भी घोषित करेंगे।