Wednesday, September 2, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान, सभी DPSU को वैश्विक दिग्गज बनाने की तैयारी

by Neha
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान, सभी DPSU को वैश्विक दिग्गज बनाने की तैयारी

राजनाथ सिंह ने सभी रक्षा PSU को वैश्विक कंपनियां बनाने पर जोर दिया। आत्मनिर्भर उत्पादन, R&D, निर्यात और समय पर आपूर्ति बढ़ाने का लक्ष्य।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) की मजबूती केवल देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे संबंधित आवश्यकता है।

16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के वार्षिक प्रदर्शन की समीक्षा के दौरान रक्षा मंत्री ने कंपनियों से समय पर डिलीवरी, स्वदेशी उत्पादन, आधुनिक तकनीक और रक्षा निर्यात पर विशेष ध्यान देने को कहा।

सभी DPSU को वैश्विक दिग्गज बनाने का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने सभी रक्षा उपक्रमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के रूप में विकसित करना होगा।

उन्होंने DPSU को सलाह दी कि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता में लगातार सुधार करें और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर काम करें। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारतीय रक्षा कंपनियां केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित न रहें, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत पहचान बनाएं।

समय पर आपूर्ति और आयात निर्भरता कम करने पर जोर

रक्षा मंत्री ने रक्षा कंपनियों से उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सैन्य जरूरतों के लिए जरूरी उपकरणों की समय पर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।

साथ ही उन्होंने आयात पर निर्भरता घटाने और देश में ही आवश्यक रक्षा उपकरण, कलपुर्जे और तकनीक विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करने को कहा।

R&D में निवेश को तकनीकी उपलब्धियों में बदलने की जरूरत

राजनाथ सिंह ने DPSU द्वारा अनुसंधान एवं विकास (R&D) में बढ़ाए गए निवेश का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि R&D की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितना पैसा खर्च किया गया। उनके मुताबिक, वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब निवेश से नई तकनीक, बौद्धिक संपदा, प्रोटोटाइप और उपयोगी रक्षा उत्पाद विकसित हों।

रक्षा मंत्री ने ऐसे तकनीकी क्षेत्रों की पहचान करने की आवश्यकता भी बताई, जहां भारत आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ दुनिया में नेतृत्व की स्थिति हासिल कर सकता है।

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रक्षा निर्यात बढ़ाने और स्टार्टअप को सहयोग की अपील

सिंह ने रक्षा उपक्रमों को देश के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए रणनीति बनाने को कहा। उन्होंने स्टार्टअप और MSME क्षेत्र को ज्यादा अवसर और सहयोग देने पर भी जोर दिया।

इसके अलावा पूंजीगत खर्च बढ़ने के साथ उत्पादकता में सुधार, सप्लाई चेन को मजबूत करने और बड़ी रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

वैश्विक संघर्षों से मिली सप्लाई चेन की सीख

रक्षा मंत्री ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी देश के लिए मजबूत और भरोसेमंद रक्षा आपूर्ति श्रृंखला कितनी जरूरी है।

उन्होंने आपात स्थिति में उत्पादन क्षमता बनाए रखने, महत्वपूर्ण कलपुर्जों की उपलब्धता, तेज मरम्मत व्यवस्था और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के दौरान निरंतर उत्पादन करने की क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताया।

16 रक्षा उपक्रमों के प्रदर्शन की हुई समीक्षा

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह को रक्षा उपक्रमों के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों ने अपनी कंपनियों के प्रदर्शन, उपलब्धियों और आगे की योजनाओं की जानकारी दी।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में स्वदेशी विनिर्माण, रक्षा तकनीक, निर्यात, सप्लाई चेन और प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

सात DPSU ने सौंपे ₹3,951 करोड़ के लाभांश चेक

कार्यक्रम के दौरान सात रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार के इक्विटी शेयरों पर कुल 3,951 करोड़ रुपये का लाभांश रक्षा मंत्री को सौंपा।

इन कंपनियों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), BEML और MIDHANI शामिल हैं।

चार पुस्तकों का भी हुआ विमोचन

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम के दौरान रक्षा क्षेत्र से संबंधित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया। इनमें ‘आत्मनिर्भर DPSU – आत्मनिर्भरता की ओर DPSU की यात्रा’ नामक पुस्तक भी शामिल रही।

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