प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘Wed in India’ मंत्र विदेश में शादी के बढ़ते ट्रेंड पर सवाल उठाता है। जानें इसका मतलब, भारतीय अर्थव्यवस्था और वेडिंग इंडस्ट्री पर असर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को आगे बढ़ाते हुए देशवासियों के सामने एक नया मंत्र रखा है। पीएम मोदी ने लोगों से विदेशों में शादी करने के बजाय भारत में ही विवाह समारोह आयोजित करने की अपील की है। उन्होंने इसे ‘Wed in India’ यानी ‘भारत में शादी’ का नाम दिया। आखिर प्रधानमंत्री की इस अपील के पीछे क्या सोच है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है, आइए समझते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए नागरिकों से स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का आग्रह किया। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक ताकत को और मजबूत करने में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
विदेशों में शादी को लेकर पीएम मोदी ने क्यों जताई चिंता?
भारत में पिछले कुछ वर्षों में विदेशी डेस्टिनेशन पर शादी करने का चलन तेजी से लोकप्रिय हुआ है। खासकर बड़े बजट और लग्जरी वेडिंग के लिए भारतीय परिवार थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, वियतनाम और यूरोप के अलग-अलग देशों का रुख करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी ट्रेंड को लेकर लोगों से सवाल किया कि जब भारत में खूबसूरत और शानदार डेस्टिनेशन उपलब्ध हैं, तो शादी जैसे बड़े आयोजन के लिए विदेश जाने की जरूरत क्यों है। उन्होंने लोगों से विदेश में शादी करने के बजाय देश में ही ऐसे समारोह आयोजित करने की अपील की।
पीएम मोदी का कहना है कि अगर शादी का खर्च भारत में किया जाता है, तो इससे देश के होटल, पर्यटन, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट, इवेंट मैनेजमेंट और स्थानीय कारोबार को सीधे फायदा पहुंच सकता है।
क्या है ‘Wed in India’ का असली मतलब?
‘Wed in India’ का मतलब केवल शादी भारत में करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सोच भी जुड़ी हुई है। जब कोई बड़ा विवाह समारोह देश के भीतर आयोजित होता है, तो उससे कई अलग-अलग सेक्टर में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
एक डेस्टिनेशन वेडिंग में होटल बुकिंग से लेकर सजावट, खानपान, कपड़े, ज्वेलरी, फोटोग्राफी, ट्रांसपोर्ट और मनोरंजन तक कई सेवाओं पर खर्च होता है। अगर यही पैसा विदेश के बजाय भारत में खर्च किया जाए, तो इसका बड़ा हिस्सा भारतीय कारोबार और सेवा क्षेत्र में रह सकता है।
also read: जीडीएस भर्ती 2026: डाक विभाग में 23,757 पदों पर भर्ती…
विदेशों में हर साल कितनी भारतीय शादियां होती हैं?
विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग को लेकर वेडिंग इंडस्ट्री और कंज्यूमर सेक्टर की अलग-अलग रिपोर्टों में कई अनुमान सामने आते रहे हैं। कुछ उद्योग अनुमानों के मुताबिक हर साल करीब 5,000 भारतीय डेस्टिनेशन वेडिंग विदेशों में आयोजित की जाती हैं।
इन रिपोर्टों में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इन आयोजनों के जरिए भारतीय परिवारों का हजारों करोड़ रुपये का खर्च विदेशी बाजारों में पहुंचता है। हालांकि, इन आंकड़ों का कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें उद्योग के अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
भारत और विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग का खर्च
डेस्टिनेशन वेडिंग का बजट कई चीजों पर निर्भर करता है। मेहमानों की संख्या, होटल, लोकेशन, शादी के कार्यक्रमों की संख्या और सुविधाओं के स्तर के आधार पर खर्च में काफी अंतर हो सकता है।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत खर्च लगभग 58 लाख रुपये के आसपास हो सकता है, जबकि विदेश में इसी तरह के आयोजन का बजट करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, ये आंकड़े निश्चित नहीं हैं और वास्तविक खर्च शादी के पैमाने के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।
थाईलैंड से लेकर यूरोप तक पसंदीदा डेस्टिनेशन
भारतीय कपल्स और परिवारों के बीच थाईलैंड विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए एक लोकप्रिय विकल्प रहा है। समुद्र तट, लग्जरी रिसॉर्ट और भारतीय मेहमानों के लिए उपलब्ध सुविधाएं इसे आकर्षक बनाती हैं।
इसके अलावा यूएई, वियतनाम और श्रीलंका भी भारतीयों के बीच पसंद किए जाने वाले डेस्टिनेशन में शामिल हैं। यूरोप की बात करें तो इटली, स्पेन और ग्रीस जैसे देशों को खासतौर पर हाई-बजट और लग्जरी वेडिंग के लिए चुना जाता है।
श्रीलंका में भारतीय डेस्टिनेशन वेडिंग की मांग में 2025 के दौरान करीब 25 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा भी कुछ उद्योग रिपोर्टों में किया गया है। हालांकि, ऐसे आंकड़े स्रोत और रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग के बढ़ते विकल्प
भारत में भी डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए कई शानदार जगहें मौजूद हैं। राजस्थान के ऐतिहासिक महल, गोवा के समुद्र तट, केरल के प्राकृतिक स्थल और उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र शादी के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
भारत में शादी करने का एक फायदा यह भी है कि परिवारों को स्थानीय संस्कृति, भोजन और परंपराओं को शादी का हिस्सा बनाने का मौका मिलता है। साथ ही मेहमानों के लिए ट्रैवल और अन्य व्यवस्थाएं भी कई मामलों में आसान हो सकती हैं।
वेडिंग इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा फायदा
अगर ज्यादा भारतीय परिवार विदेशों के बजाय भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का विकल्प चुनते हैं, तो इसका सीधा फायदा घरेलू वेडिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है। होटल और रिसॉर्ट से लेकर कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट, ट्रैवल, फोटोग्राफी और सजावट से जुड़े कारोबारों में मांग बढ़ सकती है।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ छोटे कारोबारियों और सेवा प्रदाताओं की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है। यही कारण है कि ‘Wed in India’ को केवल शादी से जुड़ी अपील के बजाय पर्यटन और घरेलू अर्थव्यवस्था से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
विदेशी शादी के साथ ट्रैवल इंश्योरेंस की मांग भी बढ़ी
विदेशों में शादी करने वाले परिवारों के लिए यात्रा से जुड़े खर्च के साथ ट्रैवल इंश्योरेंस भी महत्वपूर्ण हो जाता है। Policybazaar के आंकड़ों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय शादियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
इससे संकेत मिलता है कि विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग केवल वेडिंग सर्विस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ट्रैवल, होटल, इंश्योरेंस और दूसरे संबंधित क्षेत्रों का कारोबार भी जुड़ा हुआ है।
‘Wed in India’ से क्या बदल सकता है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘Wed in India’ अपील का मुख्य फोकस देश के भीतर खर्च और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। अगर भारतीय परिवार शादी जैसे बड़े आयोजनों के लिए घरेलू डेस्टिनेशन को प्राथमिकता देते हैं, तो इससे भारत के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की व्यापक सोच से भी जुड़ी हुई दिखाई देती है। हालांकि, विदेशों में शादी करने का फैसला व्यक्तिगत पसंद और बजट पर निर्भर करता है। ऐसे में ‘Wed in India’ को एक अनिवार्य नीति के बजाय प्रधानमंत्री की आर्थिक और सामाजिक अपील के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।