सुखना झील का जलस्तर 1162.95 फीट पहुंचने पर चंडीगढ़ प्रशासन ने रेडियल गेट खोला। जानें पानी की निकासी, बाढ़ से बचाव और प्रशासन की तैयारियों की पूरी जानकारी।
मानसून के बीच सुखना झील में पानी का स्तर बढ़ने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाया है। झील का जलस्तर 1162.95 फीट पहुंचने पर रात करीब 8:30 बजे रेडियल गेट नंबर-1 को तीन इंच तक खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी शुरू की गई।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए खोला गया गेट
मानसून के दौरान लगातार हो रही बारिश और कैचमेंट एरिया से पानी की आवक के चलते सुखना झील का जलस्तर बढ़ा। जलस्तर 1162.95 फीट तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने संभावित जलभराव और बाढ़ के खतरे को देखते हुए रेडियल गेट नंबर-1 को आंशिक रूप से खोला। इस कदम का मकसद झील में जमा अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना और जलस्तर को सुरक्षित सीमा में बनाए रखना है।
चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला प्रशासन को दी गई जानकारी
झील से पानी छोड़े जाने से पहले चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के डिप्टी कमिश्नरों को इसकी जानकारी दे दी गई। साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरतने और जरूरी एहतियाती इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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24 घंटे निगरानी में सुखना झील
इंजीनियरिंग विभाग ने सुखना झील के रेगुलेटर एंड पर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की है। अधिकारियों की टीम लगातार झील के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन के मुताबिक, अगर जलस्तर में दोबारा तेजी से बढ़ोतरी होती है तो स्थिति के अनुसार अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
बाढ़ के खतरे को रोकने की तैयारी
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सुखना झील के जलस्तर को नियंत्रित रखना और कैचमेंट क्षेत्र से आने वाले अतिरिक्त पानी की वजह से आसपास के इलाकों, सरकारी संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान से बचाना है।
अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान झील की स्थिति पर लगातार निगरानी जारी रहेगी। मौसम और जलस्तर में बदलाव के आधार पर आगे भी जरूरी निर्णय लिए जाएंगे।
निचले इलाकों में विशेष सतर्कता
पानी की निकासी को देखते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन संभावित बाढ़ या जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाए हुए है। फिलहाल सुखना झील के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए निगरानी और पानी की निकासी की प्रक्रिया जारी है।