आम आदमी पार्टी नेता संजीव झा ने यमुना बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुनर्वास को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों के लिए ठोस योजना की मांग की।
आम आदमी पार्टी के नेता संजीव झा ने यमुना बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों को लेकर आए हाईकोर्ट के आदेश पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद हजारों-लाखों परिवारों के सामने बेघर होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यमुना किनारे बसे लोगों को लंबे समय से राजनीतिक मंचों पर लगातार आश्वासन दिए जाते रहे हैं कि किसी का घर नहीं टूटेगा और सभी को सुरक्षित रखा जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
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पुनर्वास योजना पर सरकारों की चुप्पी पर सवाल
संजीव झा ने कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार दोनों को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए स्पष्ट और ठोस योजना सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यावहारिक नीति बनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इन इलाकों में रहने वाले लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनका जीवन, रोजगार और भविष्य पूरी तरह से इन बस्तियों से जुड़ा हुआ है।
यमुना बाढ़ क्षेत्र की कॉलोनियों पर हाईकोर्ट के आदेश ने एक बार फिर बीजेपी और दिल्ली सरकार, दोनों के दावों की पोल खोल दी है।
दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक मंचों पर खड़े होकर कह रहे कि “इन कॉलोनियों को राहत दी जाएगी, एक भी ईंट नहीं टूटेगी, किसी को उजाड़ा नहीं जाएगा।”… pic.twitter.com/kZge5bb2tI
— Sanjeev Jha (@Sanjeev_aap) June 25, 2026
लाखों लोगों की आजीविका पर असर की आशंका
यमुना किनारे बसी कॉलोनियों और गांवों में रहने वाले लोगों के अनुसार, यदि पुनर्वास की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो सकते हैं। इससे न केवल उनकी आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा भी बढ़ेगी। संजीव झा ने कहा कि यह समय राजनीतिक टकराव का नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के हित में ठोस समाधान निकालने का है।
ठोस पुनर्वास नीति की मांग
AAP नेता ने मांग की कि सरकार तुरंत एक व्यापक पुनर्वास नीति तैयार करे, जिसमें प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित विकल्प दिए जाएं। उन्होंने कहा कि यमुना क्षेत्र के निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं है।