Thursday, August 20, 2026

वेस्ट यूपी में मौका किसे मिलेगा? क्या नागर शर्मा या बीजेपी टीम मोदी में शामिल होंगे?

by editor
वेस्ट यूपी में मौका किसे मिलेगा? क्या नागर शर्मा या बाजपेयी टीम मोदी में शामिल होंगे?

बीजेपी सांसद वेस्ट यूपी के कई लोकसभा क्षेत्रों में नहीं हैं। जिन क्षेत्रों में वह सांसद है, वे कई कारणों से मंत्री पद की दौड़ से बाहर हैं। वर्तमान सियासी गणित के अनुसार, पश्चिम के सिर्फ तीन सांसद मंत्री बन सकते हैं।

शदाब रिजवी, मेरठ: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बताया कि केबिनेट के विस्तार के बाद बनने वाली टीम मोदी पर ध्यान देगी। दरअसल, 2014 में बनाई गई पहली मोदी टीम में उत्तर प्रदेश से चार लोगों ने मंत्री पद पर मजबूत हिस्सेदारी ली थी। 2019 में मोदी की दूसरी टीम में भी वेस्ट यूपी से दो लोगों को मंत्री बनाया गया था। लेकिन 2024 में बनाई गई तीसरी टीम में कोई मंत्री नहीं है। ऐसे में पश्चिम जल्द ही केंद्रीय केबिनेट के विस्तार में भाग ले सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों की आशा है कि मेरठ से लक्ष्मीकांत बाजपेयी, गौतम बुद्ध नगर से सुरेंद्र नागर और डॉक्टर महेश शर्मा की किस्मत खुलेगी।

2014 और 2019 के मुकाबले उत्तरी यूपी में बीजेपी के सांसदों की संख्या बहुत कम है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैर-बीजेपी सांसद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, कैराना, मुरादाबाद, नगीना, बागपत, बिजनौर, रामपुर, संभल और बदायूं में हैं। इनमें बिजनौर और बागपत में भाजपा के राजनीतिक सहयोगी रालोद के सांसद शामिल हैं। रालोद से पहले से केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत हैं, इसलिए सांसद चंदन सिंह चौहान और डॉक्टर राजकार सांगवान को मंत्री बनना संभव नहीं है।

अरुण गोविल मंत्री बनने की संभावना नहीं है।

बीजेपी सांसद मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा और फतेहपुर सीकरी में हैं। मंत्री बनने की संभावना कम होने के कई कारण हैं। जब बीजेपी अयोध्या में चंदा चोरी को लेकर बदनाम हो रही थी, मेरठ के अरुण गोविल का नाम मंत्री बनने के लिए चला गया। अब उनके मंत्री बनने की संभावना कम है। गाजियाबाद के अतुल गर्ग पहली बार सांसद हैं और वैश्य मंत्री पहले से ही हैं, इसलिए उनके पास कोई चांस नहीं है। बुलंदशहर से सांसद डॉक्टर भोला सिंह ने तीन बार चुनाव जीता है। वह मंत्री हो सकते थे, लेकिन अब संगठन में राष्ट्रीय सचिव हैं। सतीश गौतम अलीगढ़ में विवादों में रहते हैं। बीजेपी में कई ब्राह्मण चेहरे उनसे अधिक प्रभावी हैं। भाजपा ने फतेहपुर सीकरी से राजकुमार चाहर को किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाया है। मोदी सरकार में आगरा से एसपी सिंह बघेल मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं।

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किस्मत उनके लिए खुल सकती है

ऐसे में उत्तरी यूपी में मंत्रियों की कमी को भरने के लिए तीन नाम बड़े पैमाने पर चर्चा में हैं। गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉक्टर महेश शर्मा, जो पहले भी केंद्र में मंत्री रहे हैं, गौतमबुद्धनगर के ही रहने वाले राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, जो मूल रूप से बुलंदशहर के गुलावठी के निवासी हैं, और मेरठ के रहने वाले पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी। बाजपेयी वरिष्ठ हैं। वे मंत्री बनने के लिए कई बार चुने गए हैं। महेश शर्मा ने तीसरी बार चुनाव जीता है। केंद्रीय नेता उनके निकट हैं। बाजपेयी और महेश शर्मा हिंदू हैं। बीजेपी सुरेंद्र नागर को लेकर गुर्जरों, खासकर पिछड़े लोगों पर दांव लगा सकती है। हालाँकि हरियाणा के कृष्णपाल गूजर पहले से केंद्रीय मंत्री हैं, सियासी विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में चुनाव अभी नहीं हैं, क्योंकि यूपी में चुनाव 2027 में होंगे। यूपी में गूजर बहुत प्रभावी माने जाते हैं। यह नागर पार्टी के लिए अधिक लाभदायक हो सकता है। इसलिए, वेस्ट यूपी में इन तीन दादेवारों को बहुत प्रशंसा मिल रही है।

वेस्ट यूपी से अब तक मोदी टीम में रहे हैं

2014 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में नोएडा से मेरठ मंडल के डाक्टर महेश शर्मा, गाजियाबाद से जरलन वीके सिंह, मुजफ्फरनगर से डॉक्टर संजीव बालियान और बागपत से सत्यपाल सिंह थे। सत्यपाल सिंह और बालियान दोनों मंत्री बने। 2019 में, गाजियाबाद से जरनल वीके सिंह और मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान मंत्री बने। 2024 में उत्तरी यूपी से कोई मंत्री नहीं बनाया गया। बीजेपी से सहयोग करने के बाद चौधरी जयंत मंत्री बन गए। रालोद कोटे में वे मंत्री हैं।

बीजेपी का संगठनात्मक वेस्ट यूपी: बीजेपी ने मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, संभल और रामपुर मंडल के चौबीस जिलों को शामिल किया है। इन जिलों में 71 विधानसभा सीटें हैं, साथ ही 14 लोकसभा सीटें भी हैं। 2022 के चुनाव में भाजपा ने 40 सीटें और सपा-रालोद गठबंधन ने 31 सीटें जीतीं। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सात सीटें जीतीं, जबकि विपक्ष सिर्फ सात सीटों पर जीता था।

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