पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में 3.6 लाख छात्राओं के लिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे स्कूलों में स्वास्थ्य जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियों के लिए देश का सबसे बड़ा स्कूल-आधारित मेंस्ट्रुअल हेल्थ शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाना है।
यह कार्यक्रम मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे के अवसर पर शुरू किया गया, जिसे राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
3.6 लाख छात्राओं को मिलेगा लाभ
विस्तारित मेंस्ट्रुअल हाइजीन पाठ्यक्रम पंजाब के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक पढ़ने वाली 3.6 लाख से अधिक छात्राओं तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत छात्राओं को वैज्ञानिक और सही जानकारी दी जाएगी ताकि वे अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता को बेहतर तरीके से समझ सकें।
शिक्षकों का प्रशिक्षण और मास्टर ट्रेनर तैयार
इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अब तक 7,200 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही लगभग 100 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं, जो स्कूल स्तर पर शिक्षकों को मार्गदर्शन देंगे। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्कूलों में एक समान और सही तरीके से शिक्षा प्रदान की जाए।
The Mann Govt has launched India’s largest school-based menstrual health education programme for adolescent girls in government schools.
Launched on Menstrual Hygiene Day (May 28), the expanded Menstrual Hygiene Curriculum will cover over 3.6 lakh girls studying in Classes 6 to… pic.twitter.com/i7wS4xOF5U
— AAP Punjab (@AAPPunjab) May 29, 2026
पायलट प्रोजेक्ट से मिले सकारात्मक परिणाम
इस कार्यक्रम को लागू करने से पहले इसे पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया गया था। इस दौरान छात्राओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और भागीदारी में सुधार देखा गया। सकारात्मक परिणामों के आधार पर इसे अब पूरे राज्य में लागू किया गया है।
जागरूकता और सामाजिक बदलाव पर फोकस
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और कलंक को कम करना भी है। स्कूलों में इस तरह की शिक्षा से छात्राओं को सुरक्षित और खुला वातावरण मिलेगा।