नवजात शिशुओं में jaundice होना सामान्य है और अधिकांश मामलों में यह अपने आप ठीक हो जाता है। डॉक्टर की देखरेख में इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, हालांकि कुछ स्थितियों में यह खतरनाक भी हो सकता है। यह शिशु के समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है, इसलिए यदि कोई लक्षण नजर आए तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
नवजात शिशुओं में jaundice एक आम समस्या है, जो जन्म के बाद कई बच्चों में देखी जाती है। इस दौरान उनकी आंखों में पीलापन नजर आने लगता है, क्योंकि शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे यह स्थिति उत्पन्न होती है। आमतौर पर यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप भी ले सकती है। ऐसे में नवजात की सही देखभाल बेहद जरूरी होती है, खासकर माता-पिता को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आइए जानें कि नवजात शिशुओं में jaundice होने के कारण क्या हैं।
नवजात शिशुओं में jaundice होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें गर्भ में शिशु का पूर्ण रूप से विकसित न हो पाना और गर्भवती महिलाओं का पौष्टिक आहार की कमी शामिल है। इसके अलावा, अन्य कारक भी इस समस्या को जन्म दे सकते हैं।
लिवर का पूर्ण रूप से विकसित न होना।
जन्म के बाद लिवर का पूरी तरह कार्य न करना
नवजात शिशु का लिवर तुरंत प्रभावी रूप से काम नहीं करता, जिससे शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है और पीलिया हो सकता है।
अधिक लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना
नवजातों में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से बनती और टूटती हैं, जिससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। यदि यह बहुत अधिक बढ़ जाए, तो jaundice होने की संभावना अधिक हो जाती है।
मां और बच्चे के अलग ब्लड ग्रुप होना
अगर मां और शिशु के ब्लड ग्रुप अलग-अलग होते हैं, तो इससे jaundice विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है।
jaundice कितना गंभीर हो सकता है?
आमतौर पर jaundice एक से दो हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है। यदि शरीर में बिलीरुबिन अत्यधिक बढ़ जाए, तो यह बच्चे के मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और मानसिक विकास में बाधा डाल सकता है। लंबे समय तक बना रहने पर यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
jaundice से बचाव और उपचार
बार-बार ब्रेस्टफीडिंग कराने से पीलिया जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। यदि बच्चे की त्वचा या आंखों में पीलापन दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और इस समस्या को नजरअंदाज न करें।