Blood पतला है या गाढ़ा, यह जानने के लिए कौन-सा टेस्ट कराना चाहिए?

by editor
Blood पतला है या गाढ़ा, यह जानने के लिए कौन-सा टेस्ट कराना चाहिए?

Blood के गाढ़ा होने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें हार्ट डिजीज और स्ट्रोक शामिल हैं। Blood की गाढ़ापन जांचने के लिए कौन-सा टेस्ट करवाना चाहिए और यह कब कराना जरूरी होता है,

अगर Blood ज्यादा गाढ़ा हो जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है, खासकर दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। वहीं अगर Blood जरूरत से ज्यादा पतला हो तो भी यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पतले Blood में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है, जिससे खून का थक्का बनने में परेशानी होती है। ऐसे में किसी चोट की स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है और बिना दवा के Blood को रोकना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में यह जानना जरूरी है कि आपका Blood गाढ़ा है या पतला, और इसके लिए कौन-कौन से टेस्ट कराए जा सकते हैं, इसके बारे में यहां जानकारी दी जा रही है।

Blood का अत्यधिक गाढ़ा या पतला होना, दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं। Blood गाढ़ा होने पर दिल का दौरा, किडनी से जुड़ी बीमारियां, पैरों में थक्का जमना या डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, अगर Blood बहुत पतला है तो प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है, जिससे किसी भी छोटी चोट पर अत्यधिक Blood बह सकता है। कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है।

Blood की स्थिति जानने के लिए टेस्ट ज़रूरी

Blood गाढ़ा है या पतला, इसका पता लगाने के लिए कुछ विशेष जांच की जाती हैं। इनमें प्रमुख रूप से प्रोथ्रोम्बिन टाइम (PT), इंटरनेशनल नॉर्मलाइज्ड रेश्यो (INR) और एक्टिवेटेड पार्टियल थ्रोम्बोप्लास्टिन टाइम (aPTT) टेस्ट शामिल हैं। इन परीक्षणों के ज़रिए यह समझा जा सकता है कि खून किस स्तर पर है। यह जानकारी न सिर्फ खून की स्थिति स्पष्ट करती है, बल्कि इससे जुड़ी बीमारियों के खतरे का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

किन लोगों को करानी चाहिए ये जांच?

 ऐसे सभी लोग जो ब्लड थिनर दवाओं का सेवन कर रहे हैं, उन्हें यह जांच जरूर करानी चाहिए। इसके अलावा जो व्यक्ति अधिक मात्रा में शराब पीते हैं, उनके लिए भी यह टेस्ट जरूरी है। साथ ही, जिन्हें लिवर संबंधी समस्याएं हैं, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं, उन्हें भी समय-समय पर यह जांच करवाते रहना चाहिए। ये जांच न केवल आपके स्वास्थ्य की सही तस्वीर दिखाती हैं, बल्कि सही इलाज तय करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

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