Saturday, April 18, 2026

उत्तराखंड सरकार ने परिवार रजिस्टर में अनियमितताओं पर कड़ा कदम उठाया, राज्यभर में होगी जांच

by Neha
उत्तराखंड सरकार ने परिवार रजिस्टर में अनियमितताओं पर कड़ा कदम उठाया, राज्यभर में होगी जांच

उत्तराखंड सरकार ने परिवार रजिस्टर में अनियमितताओं पर कड़ा कदम उठाया। 2003 से अब तक की जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नियम सख्त किए जाएंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में परिवार रजिस्टर में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के मामले पर उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्यव्यापी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के आदेश दिए, जिसमें 2003 से अब तक की सभी प्रविष्टियों की समीक्षा शामिल होगी।

जांच और सुरक्षा के निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने सभी जिलों में परिवार/कुटुंब रजिस्टर की प्रतियों को तत्काल जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। साथ ही, CDO और ADM स्तर पर गहन जांच कराई जाएगी, ताकि फर्जी प्रविष्टियों और अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को समाप्त किया जा सके।

विभागीय और कानूनी कार्रवाई

बैठक में यह भी तय किया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण और प्रतिलिपि सेवाएं पंचायती राज नियमावली 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं, जिसमें प्रत्येक परिवार का नाम दर्ज करना अनिवार्य है।

सख्त नियम और पारदर्शिता

धामी ने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप-जिलाधिकारी (SDM) के पास है। भविष्य में यह प्रक्रिया और भी सख्त और पारदर्शी बनाए जाने की योजना है।

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जनसांख्यिकीय संतुलन और सीमावर्ती क्षेत्र

बैठक में यह भी पाया गया कि राज्य की सीमावर्ती जिलों में अनधिकृत बसावट के कारण परिवार रजिस्टर में फर्जी नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण नियमावली में आवश्यक संशोधन करने की योजना बनाई गई है।

आवेदन आंकड़े और फर्जी प्रविष्टियों का संकेत

पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 01 अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच परिवार रजिस्टर सेवाओं के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत और 5,429 आवेदन अपूर्ण दस्तावेजों या नियमों के उल्लंघन के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फर्जी प्रविष्टियों की ओर संकेत करता है।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

धामी ने कहा कि सरकारी अभिलेखों में किसी भी प्रकार का खेलबाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी जिलों में समान रूप से जांच कराने के निर्देश दिए, ताकि किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव न हो।

उच्चस्तरीय बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते और निदेशक पंचायती राज निधि यादव भी उपस्थित रहे।

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