महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी विवाद तेज। AAP सांसद संजय सिंह ने मोदी सरकार पर उत्तर-दक्षिण विवाद भड़काने और देश को बांटने के आरोप लगाए। विपक्ष ने भी उठाए सवाल।
लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विवाद भड़काने की कोशिश कर रही है।
संजय सिंह ने बातचीत में दावा किया कि सरकार की नीतियां देश को बांटने की दिशा में काम कर रही हैं और इसे उन्होंने “टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसी सोच” करार दिया। उनके अनुसार, सरकार जानबूझकर विभिन्न राज्यों के बीच तनाव और असंतोष पैदा करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के दौरान जिस तरह की स्थिति बनी, उससे कई राज्यों में सीटों के पुनर्वितरण और परिसीमन को लेकर असंतोष बढ़ा है। खासकर दक्षिणी राज्यों जैसे तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को लेकर सीटों में संभावित बदलाव पर सवाल उठाए गए हैं।
डिलिमिटेशन बिल संसद में गिर गया।
मोदी और BJP टुकड़े-टुकड़े गैंग की तरह राज्यों को तोड़ना चाहती थी।
संसद में “महिला आरक्षण बिल” नही “BJP जिताओ बिल” लाया गया था।
BJP अपनी सीटें बढ़ाने की साज़िश रच रही थी जो बुरी तरह नाकाम हो गई।— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) April 17, 2026
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नॉर्थ और साउथ के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर रही थी, जिसे विपक्ष ने रोकने का काम किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार की कथित रणनीति को विफल किया।
भाजपा द्वारा विपक्ष पर महिला विरोधी होने के आरोपों पर पलटवार करते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह विधेयक वास्तव में तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हो रहा है। उन्होंने 2023 में पारित बिल का हवाला देते हुए कहा कि उसमें जनगणना और परिसीमन के बाद 2029 के बाद इसे लागू करने की बात कही गई थी।
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उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष की मांग थी कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और 2024 चुनाव में ही इसे प्रभावी बनाया जाए, लेकिन सरकार ने उस समय इसे स्वीकार नहीं किया।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सीटों के पुनर्निर्धारण और परिसीमन को लेकर जो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, वह पारदर्शिता के बिना हो रही है और इससे कई राज्यों के राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
इस पूरे मामले को लेकर संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।