भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से रूस-ईरान से सस्ता तेल आयात करने की मांग की। ईंधन महंगाई पर सियासी बहस तेज।
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीते दो सप्ताह में ईंधन कीमतों में चौथी बार वृद्धि के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि भारत रूस और ईरान जैसे देशों से सस्ता कच्चा तेल और गैस क्यों नहीं खरीद रहा है।
“सस्ता तेल क्यों नहीं खरीदा जा रहा?”
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब रूस और ईरान सस्ती दरों पर पर्याप्त मात्रा में तेल आपूर्ति करने को तैयार हैं, तो भारत उनसे आयात क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीति के कारण देश की जनता महंगाई का बोझ झेल रही है।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पिछले 10–15 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 से 8 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो आम जनता के लिए भारी आर्थिक दबाव पैदा कर रही है।
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जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ
केजरीवाल ने दावा किया कि हाल ही में कराए गए एक सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण आम नागरिकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों पर भारी असर पड़ रहा है।
प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम बढ़े
लगातार बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चला गया है, जबकि डीजल भी महंगा हो गया है। कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में भी ईंधन कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
तेल के दाम फिर बढ़ गए। हम फिर भी रूस और ईरान से सस्ता तेल नहीं ले रहे। मोदी जी की ऐसी क्या मजबूरी है? pic.twitter.com/kmwMWd5Dqy
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 25, 2026
CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी
इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में सीएनजी के दाम भी बढ़कर 81 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो गए हैं, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ा है।
वैश्विक कारण और बाजार अस्थिरता
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
जनता और सरकार के बीच बहस तेज
ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने एक बार फिर सरकार की आयात नीति और आर्थिक रणनीति पर बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि सस्ता तेल उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ जनता तक नहीं पहुंच रहा है, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रही है।