प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में वंदे मातरम पर चर्चा करते हुए जिन्ना और नेहरू की भूमिका पर सवाल उठाए, इस पवित्र गीत के साथ हुए अन्याय को उजागर किया और इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सोमवार को लोकसभा में हुई चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया और विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने विशेष रूप से वंदे मातरम को लेकर मुहम्मद अली जिन्ना और पंडित नेहरू की भूमिका पर सवाल उठाए।
also read: प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी सेना में भर्ती भारतीय नागरिकों…
यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की मुख्य बातें दी गई हैं:
-
वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान के रूप में माना था। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले एक सदी में इस गीत के साथ इतना अन्याय क्यों हुआ? पीएम मोदी ने यह भी पूछा कि वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ और वह कौन सी ताकतें थीं जिनकी इच्छा बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी?
-
जिन्ना और नेहरू की भूमिका पर सवाल: पीएम मोदी ने जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग द्वारा वंदे मातरम का विरोध और नेहरू द्वारा इस गीत को नजरअंदाज किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। मोदी ने यह सवाल भी उठाया कि क्यों ऐसे पवित्र गीत को विवादों में घसीटा गया और क्यों नेहरू सरकार ने इसे नजरअंदाज किया?
-
गांधी का वंदे मातरम के प्रति प्यार: पीएम मोदी ने 2 दिसंबर 1905 में महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला दिया, जिसमें गांधी ने वंदे मातरम की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि यह गीत बंगाल में बहुत लोकप्रिय हो गया था और स्वदेशी आंदोलन के दौरान लाखों लोग इसे गाते थे। गांधी के अनुसार, वंदे मातरम का उद्देश्य केवल देशभक्ति की भावना को जागृत करना था।
-
वंदे मातरम के साथ विश्वासघात: प्रधानमंत्री मोदी ने यह सवाल उठाया, “वंदे मातरम के साथ ऐसा विश्वासघात क्यों हुआ? ऐसा कौन सा शक्तिशाली तत्व था जिसने इसे विवादों में घसीटा?”
-
नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता का सवाल: पीएम मोदी ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह देश की एकता और राष्ट्र प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने वंदे मातरम के महत्व को बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और इसे भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताया।