Saturday, April 18, 2026

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ: अंबाला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सामूहिक गायन में हिस्सा लिया, कहा- इस गीत ने अंग्रेजों की जड़ों को हिलाया

by Neha
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ: अंबाला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सामूहिक गायन में हिस्सा लिया, कहा- इस गीत ने अंग्रेजों की जड़ों को हिलाया

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अंबाला में वंदे मातरम के 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया और सामूहिक गायन किया। सीएम ने गीत की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत की आत्मा और राष्ट्रशक्ति का प्रतीक बताया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अंबाला में आयोजित ‘वंदे मातरम’ के 150वीं वर्षगांठ के विशेष अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, अधिकारियों, स्कूली छात्रों और नागरिकों के साथ मिलकर ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया।

वंदे मातरम गीत का 150 साल पूरा होने पर पुलिस लाइन मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सैनी मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत मां अंबिका के नाम से की और गीत की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा है, इसकी धड़कन है। यह गीत भारत की पहचान है और हमारे राष्ट्रवाद का प्रतीक है।”

उन्होंने इस गीत को एक संपूर्ण देशभक्ति और एकता का प्रतीक बताया। सीएम ने कहा, “वंदे मातरम गीत हमारी मातृभूमि को मां के रूप में देखने वाली सनातन दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। यह हर भारतीय नागरिक के लिए मर्यादा, अनुशासन और त्याग की भावना को जोड़ने वाला मंत्र है।”

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वंदे मातरम का ऐतिहासिक योगदान

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वंदे मातरम ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिला दिया। उन्होंने इस गीत को आत्मबल का एक शंखनाद और भारत की स्वतंत्रता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सीएम ने जोर दिया कि वंदे मातरम गीत में भारत की नदियों की कल-कल ध्वनि, खेतों की हरियाली और धरती का गौरव शामिल है, जो इसे देशवासियों के लिए एकता का अमृत मंत्र बनाता है।

मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम गीत की महत्ता पर जताई श्रद्धा

सीएम सैनी ने अपने संबोधन में कहा, “वंदे मातरम गीत ने यह सिद्ध कर दिया कि हम सिर्फ एक प्रजा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रशक्ति हैं। यह गीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर, राष्ट्रीयता और भारतीयता को सशक्त बनाता है।”

कार्यक्रम के अंतर्गत, मुख्यमंत्री ने राज्य के नागरिकों, स्कूली बच्चों और सभी भागीदारों के साथ मिलकर इस गीत का सामूहिक गायन किया, जो एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पल था।

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