पंजाब कैबिनेट ने डी-सिल्टिंग टेंडर व डीसी को अतिरिक्त अधिकार देने के अहम फैसले लिए। हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इससे कार्यों में तेजी आएगी।
पंजाब के वित्त मंत्री और कैबिनेट प्रवक्ता हरपाल सिंह चीमा ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। इन फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करना और राज्य में बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है।
डी-सिल्टिंग टेंडर को लेकर बड़ा निर्णय
कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि अब नालों और नहरों की डी-सिल्टिंग के टेंडर एक ही योग्य बोलीदाता को दिए जा सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से टेंडर प्रक्रिया सरल होगी और कार्यों के क्रियान्वयन में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना और जलभराव जैसी समस्याओं से प्रभावी तरीके से निपटना है।
ਕੈਬਿਨੇਟ ਮੰਤਰੀ @HarpalCheemaMLA ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਮੰਤਰੀ ਮੰਡਲ ਦੇ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ਬਾਰੇ ਦਿੱਤੀ ਅਹਿਮ ਜਾਣਕਾਰੀ !!
👉 ਸਿੰਗਲ ਬਿਡਰ ਨੂੰ ਵੀ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਡੀਸਿਲਟਿੰਗ ਦਾ ਟੈਂਡਰ
👉 ਕਿਸੇ ਵੀ ਜਗ੍ਹਾ ‘ਤੇ ਤੁਰੰਤ ਡੀਸਿਲਟਿੰਗ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਡੀ.ਸੀ. ਨੂੰ ਦਿੱਤੇ ਅਧਿਕਾਰ pic.twitter.com/NVDj8nUNal— AAP Punjab (@AAPPunjab) June 10, 2026
जिला उपायुक्तों को मिले अतिरिक्त अधिकार
सरकार ने जिला उपायुक्तों (D.C.) को यह अधिकार प्रदान किया है कि वे जरूरत पड़ने पर किसी भी क्षेत्र में तुरंत डी-सिल्टिंग कार्य शुरू करवा सकें। इससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी। अधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से जलभराव और सफाई से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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राजनीतिक संदर्भ
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का दावा है कि वह युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के विकास पर लगातार काम कर रही है। वहीं विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों पर समय-समय पर आलोचना की जाती रही है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी भी शामिल है। सरकार का कहना है कि ये सभी निर्णय राज्य में सुशासन और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से लिए गए हैं।