मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बिश्नोई समाज के संतों से मुलाकात में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की अहमियत बताई। जानें कैसे सरकार और समाज मिलकर राजस्थान में प्रकृति और जैव विविधता की रक्षा कर रहे हैं।
फरवरी 2026 में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बिश्नोई समाज के संत-महंतों ने मुख्यमंत्री आवास, जयपुर में भेंट की। इस अवसर पर संतों ने मुख्यमंत्री को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण हर नागरिक की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह केवल कानून तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नागरिकों के जीवन में यह एक आदत और सामाजिक कर्तव्य बननी चाहिए।
बिश्नोई समाज की प्रेरक परंपरा
बिश्नोई समाज प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपने गहरे प्रेम और सम्मान के लिए प्रसिद्ध है। यह समुदाय 29 नियमों का पालन करता है, जिनमें पेड़ों और वन्यजीवों की रक्षा शामिल है। खेजड़ी वृक्ष और काले हिरण की सुरक्षा इस समाज के धार्मिक कर्तव्यों का हिस्सा हैं। उनकी यह परंपरा आज भी पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणा स्रोत मानी जाती है।
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सरकार की योजनाएं और पहल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार जनभागीदारी बढ़ाने वाले अभियान चला रही है। सरकार न केवल विकास पर ध्यान देती है, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देती है।
संतों का आभार
बिश्नोई समाज के संतों और महंतों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और समर्थन के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज की जीवनशैली और पारंपरिक मान्यताएँ आज और भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देती हैं।
समग्र संदेश
इस मुलाकात का मुख्य संदेश यह है कि सरकार और समाज मिलकर पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा कर सकते हैं। जब दोनों मिलकर काम करेंगे, तभी बेहतर पर्यावरण और सुरक्षित जैव विविधता सुनिश्चित की जा सकती है। यह बैठक सामूहिक प्रयासों के जरिए पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाने का उदाहरण बनी है।