Sunday, May 10, 2026

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 41वीं राज्य पशु मेला में भाग लिया, ऊंट सवारी और किसानों से संवाद

by Neha
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 41वीं राज्य पशु मेला में भाग लिया, ऊंट सवारी और किसानों से संवाद

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 41वीं राज्य पशु मेला में हिस्सा लिया, ऊंट सवारी की और किसानों से संवाद किया। जानें कैसे यह मेला पशुपालन, डेयरी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र में आयोजित 41वीं राज्यस्तरीय पशु मेला (Livestock Exhibition) में भाग लिया। तीन दिवसीय यह मेला 6 से 8 फरवरी 2026 तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मेला मैदान में आयोजित हुआ। इस मेले में पूरे राज्य से लगभग 1 लाख किसानों और पशुपालकों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी।

पशुपालन को आधुनिक और लाभकारी बनाने का संदेश

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मौके पर कहा कि हरियाणा सरकार पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक, लाभकारी और सतत बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पशुपालन सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि किसानों के लिए आय का मजबूत स्रोत भी बन सकता है। सरकार इस दिशा में पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, डेयरी विपणन, प्रशिक्षण और क्रेडिट सुविधाओं को और मजबूत कर रही है।

ऊंट सवारी और पशुओं के साथ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऊंट की सवारी की और गाय-भैंस को गुड़ खिलाया। इससे उन्होंने स्थानीय किसानों और पशुपालकों के साथ सीधे संवाद स्थापित किया और सरकारी योजनाओं में भरोसा बढ़ाया।

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श्रेष्ठ नस्लों का प्रदर्शन और पुरस्कार

पशु मेले में लगभग 1500 श्रेष्ठ नस्लों के पशु भाग लिए और उन्हें विभिन्न प्रतियोगिता श्रेणियों में प्रदर्शित किया गया। प्रतियोगिताओं में जीतने वाले किसानों को नकद पुरस्कार दिए गए, जिससे बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक पालन-पोषण को बढ़ावा मिलेगा।

नवीन तकनीक और ज्ञान साझा करना

इस मेले का एक मुख्य उद्देश्य किसानों को पशुपालन से जुड़ी नवीन तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देना था। विभाग ने पशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, आधुनिक आहार और कृषि-पशुपालन ज्ञान साझा करने के कार्यक्रम आयोजित किए। इससे किसान बेहतर निर्णय ले सकेंगे और उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेंगे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। यह मेला “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पशुपालकों की आय बढ़ेगी, रोजगार सृजित होंगे और ग्रामीण स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

किसानों और दर्शकों के लिए सुविधाएं

मेले के दौरान सरकार ने पशुपालकों और दर्शकों के लिए निःशुल्क बसों, भोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की। इससे दूर-दराज के किसान भी मेले में आसानी से भाग ले सके और ग्रामीण समुदाय में उत्साह बढ़ा।

पशुपालन को बढ़ावा देने वाली पहल

इस राज्य स्तरीय पशु मेला ने यह साबित किया कि सरकार किसानों और पशुपालकों के साथ मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। आयोजनों के जरिए किसान नई तकनीक, बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक पशुपालन सीख सकते हैं और अपने व्यवसाय में सुधार कर सकते हैं।

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