महिला मोर्चा अध्यक्ष पायल साकरिया और प्रदेश संगठन मंत्री विक्रम द्वारा महिला सुरक्षा मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CM हाउस की ओर रवाना होते AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया
आम आदमी पार्टी महिला मोर्चा की अध्यक्ष पायल साकरिया और प्रदेश संगठन मंत्री विक्रम दवे ने गांधीनगर सर्किट हाउस में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस अवसर पर ’आप’ नेता पायल साकरिया ने बताया कि, हमने पहले भी आंदोलनों और प्रस्तुतियों के माध्यम से गुजरात की वास्तविकता सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। तीस वर्षों से भाजपा का शासन और पिछले दस वर्षों से ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार होने के बावजूद राज्य में महिला सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। मंत्री बड़ी सभाओं में गुजरात में महिलाओं के पूरी तरह सुरक्षित होने के दावे करते हैं, लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2015 से 2024 तक 6,100 से अधिक महिलाओं के साथ दुष्कर्म, 50,000 से अधिक महिलाओं के अपहरण और 3 लाख से अधिक घरेलू हिंसा के मामले दर्ज हुए हैं। खुद मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता जिस क्षेत्र से आते हैं, उस उत्तर गुजरात में 18 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के गर्भवती होने के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ‘सब सुरक्षित’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच राजधानी गांधीनगर और अहमदाबाद में बेटियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई हैं, जिसमें एक निर्दोष ने अपनी जान भी गंवा दी है। महिला सुरक्षा के लिए पिछले पांच वर्षों में सरकार द्वारा आवंटित ₹25,968 करोड़ का बजट कहां खर्च होता है और महिलाएं असुरक्षित क्यों हैं, यह बड़ा सवाल है।
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पायल साकरिया ने बताया कि, घटनाएं होने पर गृहमंत्री केवल “किसी को छोड़ा नहीं जाएगा, कानून अपना काम करेगा” जैसे बयान और वीडियो देते हैं, लेकिन हवसखोरों या माफियाओं को कानून का कोई डर नहीं रहा। सरकार के पास मौजूद ED, CBI और पूरे तंत्र का इस्तेमाल केवल विपक्षी नेताओं और हक की बात करने वाले आम लोगों की आवाज दबाने के लिए होता है। गृहमंत्री हर्ष संघवी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि, “आप गृहमंत्री हैं, रील मंत्री नहीं हैं। यह किसी फिल्म की शूटिंग नहीं चल रही है कि आप रील बनाकर लाइक्स, शेयर और पब्लिसिटी हासिल करें।” राज्य में चोरी, लूटपाट, हत्या, शराब और ड्रग्स की बिक्री आम हो गई है और अब दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध भी सामान्य माने जाने लगे हैं। खुद गृहमंत्री का होमटाउन सूरत आज पूरे देश में ‘क्राइम कैपिटल’ के रूप में दूसरे स्थान पर आ गया है। भाजपा के ही संगठन या मोर्चे के कार्यकर्ता जब ऐसी घटनाओं में शामिल होते हैं तो वोट बैंक के कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती और तंत्र आंखें मूंद लेता है।
पायल साकरिया ने जोर देकर कहा कि, जब सत्ताधारी नेता मौन साध लेते हैं तब जनता को खुद जागरूक होकर जवाब मांगना होगा। इतनी बड़ी भाजपा सरकार के पास ‘राज्य महिला आयोग’ का अध्यक्ष बनाने के लिए एक भी सक्षम महिला नहीं है और वर्षों से महिला आयोग के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। लगातार हो रही घटनाओं को लेकर जब ’आप’ महिला मोर्चा सूरत में गृहमंत्री के कार्यालय पर उनका ‘एक्शन प्लान’ पूछने गया, तब पुलिस ने हमारी हिरासत में लिया था। महिला सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि पूरे गुजरात की महिलाओं के दर्द का सवाल है। इसलिए, कागज या बैनरों के अलावा वास्तविकता में गुजरात में महिलाएं कब सुरक्षित होंगी और इस विफलता को रोकने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है, इस बारे में मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल से सीधे सवाल पूछने के लिए अहमदाबाद और गांधीनगर के महिला मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ हम मुख्यमंत्री निवास जा रहे थे, तभी सभी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया।