निबे ग्रुप और एल्बिट सिस्टम्स ने भारत में उन्नत प्रणोदक संयंत्र स्थापित करने के लिए संयुक्त उद्यम किया। यह परियोजना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगी।
भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत निबे ग्रुप ने इज़राइल की प्रमुख रक्षा तकनीकी कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के साथ एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत भारत में उन्नत ऊर्जा सामग्री और प्रणोदक (Propellant) निर्माण सुविधाओं की स्थापना की जाएगी।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बढ़ावा
यह संयुक्त उद्यम भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में रणनीतिक रक्षा उत्पादों का निर्माण और आपूर्ति को बढ़ावा देना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
उन्नत रक्षा सामग्री का होगा उत्पादन
प्रस्तावित परियोजना के तहत नाइट्रोसेलुलोज, नाइट्रोग्लिसरीन, सिंगल बेस प्रोपेलेंट, डबल बेस प्रोपेलेंट और ट्रिपल बेस प्रोपेलेंट जैसे महत्वपूर्ण रक्षा सामग्री का उत्पादन किया जाएगा। यह सामग्री आधुनिक हथियार प्रणालियों और गोला-बारूद निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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तकनीक और निवेश की जिम्मेदारी
समझौते के अनुसार एल्बिट सिस्टम्स तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञता प्रदान करेगी, जबकि निबे ग्रुप और GDIL भारत में संयंत्र की स्थापना, निवेश और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह साझेदारी भारत में रक्षा निर्माण के क्षेत्र में नई तकनीक और क्षमता को बढ़ावा देगी।
रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
इस परियोजना से भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही यह महत्वपूर्ण ऊर्जा सामग्री और प्रणोदक प्रणालियों के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
निबे ग्रुप का बयान
निबे ग्रुप के रणनीति प्रमुख बालाकृष्णन स्वामी ने कहा कि कंपनी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन और जताया भरोसा
इसी बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ शिरडी में निबे ग्रुप के रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन किया। यह परिसर उन्नत तोपखाना प्रणाली, मिसाइल, रॉकेट सिस्टम, ऊर्जा सामग्री और स्वायत्त रक्षा प्लेटफार्मों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। उन्होंने आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की रक्षा क्षमता गोला-बारूद और स्वचालन तकनीक पर निर्भर करेगी।
वैश्विक संदर्भ में भारत की बढ़ती ताकत
उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक युद्धों में तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने भी हाल के अभियानों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।