इंटेल के पास एक समय में चिप डिजाइन, उत्पादन और आय सब कुछ था। फिर, टीसीएमसी ने फाउंड्री मॉडल के साथ सेमीकंडक्टर उद्योग का पूरा चित्र बदल दिया, और अब AI इस तकनीक को एक पूरी तरह से नए स्तर पर ले गया है। तो सवाल है कि भारत सेमीकंडक्टर की अगली दौड़ में कहां रहेगा?
भारत खुद एक टेक क्रांति पैदा करेगा या सिर्फ दुनिया की एक असेंबली लाइन बन जाएगा? इन्वेस्ट इंडिया की सीईओ निवृत्ति राय ने सेमिकॉन इंडिया 2026 के लिए भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विजन पेश किया है, जो 30 वर्षों के माइक्रोचिप उद्योग की गिरावट की कहानी बताता है। उनका कहना था कि भारत को सिर्फ सरकारी अनुदान और फैक्ट्री लगाने से टेक सुपरपावर नहीं बनाया जा सकता. इसके बजाय, देश को सिलिकॉन और सिस्टम के बीच की खाली जगह भरनी होगी और अपना एनवीडिया मोमेंट बनाना होगा।
यह बात उन्होंने सेमिकॉन इंडिया 2026 समारोह में बताई। इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय ने भारत का अगला सेमीकंडक्टर हब बनाना कार्यक्रम में भारतीय टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए एक नया रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मैंने पिछले तीन साल इन्वेस्टमेंट में और कई साल सेमीकंडक्टर में बिताए हैं, जो तीन दशक का अनुभव है। आज भी मैं सेमीकंडक्टर (इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी) हूँ। उनका कहना था कि आप सिर्फ सामान्य उत्पाद बना रहे होंगे, न कि क्रांति, अगर बाजार में मांग ही नहीं होगी।
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पहला चरण (1995-2007): पीसी और इंटेल की राज
उनका कहना था कि इंटेल जैसी कंपनियों ने पर्सनल कंप्यूटर का दबदबा किया था। इसका नाम आईडीएम यान इंटीग्रेटेड मॉडल था। यानी डिजाइन, उत्पादन और मुनाफा सब एक ही कंपनी के पास था।
दूसरा चरण (2008–2018): टीएसएमसी का दबदबा, जटिल चिप्स
जैसे-जैसे ट्रांजिस्टर का आकार कम होता गया, निर्माण की लागत इतनी बढ़ गई कि गलती की संभावना समाप्त हो गई। बाद में, एपल और मेटा जैसी कंपनियों ने कपड़े बनाने का काम टीएसएमसी को सौंप दिया। यहीं से फाउंड्री और फैबलेस डिजाइन टीमों का दौर शुरू हुआ, जहां कस्टमर एक्सपीरियंस, सॉफ्टवेयर डिजाइन और असली मुनाफा आने लगा।
तीसरा चरण (2019–2025): AI और कॉम्प्लेक्स पैकेजिंग प्रतियोगिता
3D/2.5-D पैकेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह दौर है। AI को पैरेलल कंप्यूटिंग की आवश्यकता थी, और एनवीडिया ने इस मांग को पूरा करके वैश्विक बाजार में अभूतपूर्व प्रगति की।
भारत में मीडिया मोमेंट: क्या मास्टरप्लान है?
तीसरे दौर में एनवीडिया की तेज वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत को भी ऐसा ही अवसर दिया। कहा कि मैं सिलिकॉन और सिस्टम के बीच मौजूद सही खाली जगहों को पकड़कर भारत के लिए एक एनवीडिया मोमेंट बनाना चाहता हूँ।