क्या AI अब स्वयं निर्णय लेने लगा है? गलती से गूगल के जेमिनी AI ने साइबर सुरक्षा जांच में तीन वास्तविक कंपनियों के डेटाबेस में घुसपैठ की। आइए इसकी विस्तृत जानकारी प्राप्त करें..।
टेक इंडस्ट्री को फिर से हैरान करने वाली खबर मिली है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा और साइबर सुरक्षा क्षमताएं सुरक्षित हैं। गूगल ने आधिकारिक तौर पर माना है कि उसकी जेमिनी AI मॉडल ने मई 2026 में एक साइबर सेफ्टी टेस्ट में स्वयं (खुद से) तीन असली कंपनियों के डेटाबेस में घुसपैठ की है। हालाँकि, इस घटना में सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि AI ने खुद को नुकसान पहुंचाने से पहले ही रोक लिया और सिस्टम से चुपचाप बाहर आ गया।
ऐसे परीक्षण लगातार किए जाते हैं जैसे-जैसे AI की शक्ति बढ़ती जाती है। हाल ही में OpenAI ने AI मॉडल के बिना निर्देश के घुसपैठ करने के बारे में एक रिपोर्ट जारी की थी, लेकिन जेमिनी की खुद-ब-खुद हैकिंग को रोकने की क्षमता ने AI ऑटोनॉमी और सेफ्टी की बहस को एक नया मोड़ दिया है।
also read: आईफोन 18 प्रो सेल: ईएमआई पर कैसे खरीदें: इंटरेस्ट रेट…
पूरा मामला कैसे शुरू हुआ?
इजरायली स्टार्टअप इरेगुलर ने कैप्चर द फ्लैग साइबर सुरक्षा अभ्यास के दौरान यह घटना घटी। परीक्षा में जेमिनी को एक काल्पनिक कंपनी के सॉफ्टवेयर से जानकारी निकालने का काम दिया गया था। समस्या यह थी कि काल्पनिक कंपनी का नाम असली कंपनी के नाम से मिलता-जुलता था।
जबकि जेमिनी को इस टेस्ट के दौरान इंटरनेट का उपयोग नहीं करना चाहिए था, मॉडल ने गलती से इंटरनेट का उपयोग किया। इसके बाद AI ने परीक्षण क्षेत्र से निकलकर सच्ची ऑनलाइन जानकारी तक पहुंच हासिल की। यानी मॉडल ने सफलतापूर्वक सिस्टम में प्रवेश करने की कोशिश की, सिर्फ टेस्ट वातावरण में काम करने के बजाय उपलब्ध जानकारी का उपयोग करते हुए।
दो मामलों में ऑनलाइन रिपॉजिटरी से प्राप्त क्रेडेंशियल्स
इसके अलावा, जेमिनी ने दो अन्य मामलों में कंपनियों के नाम से इंटरनेट खोज की। उसकी खोज के दौरान उसे सार्वजनिक ऑनलाइन रिपॉजिटरी में पुरस्कार मिले। इन गुणों का उपयोग करके, मॉडल ने संबंधित सिस्टम में प्रवेश किया। जेमिनी ने टेस्ट के दौरान तीन अलग-अलग मामलों में असली कंपनियों के सिस्टम तक पहुँच लिया।
AI ने कंपनियों को कब बताया असली ?
मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जेमिनी ने खुद ही अपनी कार्रवाई रोक दी जब उसे पता चला कि जिन कंपनियों के सिस्टम तक वह पहुंच रहा है, वे असली कंपनियां हैं और टेस्ट में शामिल नकली कंपनियां नहीं हैं। इसके बाद उसने सिस्टम में रहने के बजाय घुसपैठ करने का निर्णय लिया।
गूगल के लिए इस घटना का यही पहलू सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि मॉडल ने बिना किसी व्यक्ति के निर्देश के अपनी स्थिति को पहचाना और नुकसान करने से बच गया।
यह जानकारी गूगल को कब मिली?
जुलाई 2026 में गूगल इस घटना को जानता था। कम्पनी का कहना है कि मॉडल ने स्वयं घुसपैठ को रोका था, इसलिए उसने सार्वजनिक रूप से इस बात का खुलासा नहीं किया था।
यह घटना, गूगल सिक्योरिटी इंजीनियरिंग के VP हीदर एडकिन्स ने कहा, शक्तिशाली AI मॉडल को जिम्मेदारी से काम करने के लिए प्रशिक्षित करने के महत्व को दिखाती है। उनका मानना था कि इस मामले में मॉडल सही था। इस मामले में गूगल ने भी तीनों कंपनियों और संघीय अधिकारियों को सूचना दी। कम्पनी ने उन तीनों कंपनियों के नाम नहीं बताए हैं। साथ ही, Google ने कहा कि इस घटना में उसका सबसे नया मॉडल नहीं था।
गूगल ने इस घटना को बग बाउंटी प्रोग्राम की तरह देखा, न कि क्षतिग्रस्त ब्रीच। इसका कारण यह था कि जेमिनी ने असली कंपनियों के सिस्टम में प्रवेश किया, लेकिन उनके असली होने का पता चलने के बाद खुद ही अपना काम रोक दिया और बाहर निकल गया।
ओपनएआई और एंथ्रोपिक के मामलों से गूगल का मामला कैसे अलग है?
ओपनएआई, एंथ्रोपिक और मेटा पहले भी रेगुलर से जुड़े साइबर सुरक्षा परीक्षणों के मामले सामने आ चुके हैं। यद्यपि, जेमिनी ने खुद स्वीकार किया कि वह असली कंपनियों के सिस्टम के साथ जुड़ा हुआ था और इसके बाद उसने आगे की कार्रवाई रोक दी, इसलिए गूगल का मामला अलग चर्चा में है। एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल ने पहले भी इस तरह की जांच करने से इनकार कर दिया था।
वहीं, ओपनएआई मॉडल ने वास्तविक कंपनी को सिमुलेशन में शामिल कर लिया था।
क्यों मामले है खास?
इस घटना में, जेमिनी का असली कंपनियों के सिस्टम तक पहुँचना साइबर सिक्योरिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण था, लेकिन बाद में मॉडल ने खुद अपना काम बंद कर लिया। जानकारों का कहना है कि इस घटना से पता चलता है कि AI मॉडल केवल कार्य पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही, उसे यह समझने की क्षमता भी जरूरी है कि किसी कार्रवाई से वास्तविक जीवन में क्या हानि हो सकती है।