DELHI NEWS : दिल्ली में 29 जुलाई को हुई मूसलधार बारिश ने महज दो घंटों में राजधानी को ठप कर दिया। मात्र 100.2 मिमी से ज्यादा बारिश ने शहर के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद में जगह-जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, जो इन इलाकों में हर तेज बारिश के बाद एक आम दृश्य बन चुका है।
बारिश के बाद उत्पन्न हालात और जलभराव को लेकर एक सर्वे किया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि दिल्ली-एनसीआर के 73% लोग जलभराव से नियमित तौर पर परेशान रहते हैं। सर्वे में लोगों से पूछा गया कि उन्हें बीते 60 दिनों में जलभराव से जुड़ी समस्याएं हुईं या नहीं, तो 83% लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया। इन समस्याओं में ट्रैफिक, काम में देरी और वाहन की मरम्मत जैसे मुद्दे शामिल थे।
जवाब देने वाले अधिकांश लोगों ने अपने स्थानीय प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। जब लोगों से पूछा गया कि मानसून से पहले जलभराव को लेकर तैयारियां कैसी थीं, तो 55% ने इसे “बेहद खराब”, 18% ने “खराब”, 9% ने “औसत” और 9% ने “अच्छा” बताया, जबकि किसी ने भी “बहुत अच्छा” नहीं कहा।
सर्वे से यह भी पता चला कि जलभराव के चलते न सिर्फ लोगों की रोज़मर्रा की गतिविधियां बाधित होती हैं, बल्कि उनकी उत्पादकता और कामकाजी घंटे भी प्रभावित होते हैं। हर पाँच में से तीन लोगों ने माना कि जलभराव से उनके काम के समय में कटौती हुई है।
रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि दिल्ली-एनसीआर में जलभराव की समस्या को लेकर नागरिक जागरूक हैं और उन्हें पता है कि इसके समाधान के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत है। खासकर उन इलाकों में जहां हल्की बारिश में भी सड़कों और अंडरपास में पानी भर जाता है, प्रशासन को तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे।