Bread हर जगह आसानी से मिलने वाला और तेजी से तैयार होने वाला नाश्ता है, जिसे शहरों से लेकर गांवों तक लोग बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन रोजाना इसका सेवन न केवल शरीर के लिए, बल्कि दिमाग के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। आइए जानें कि ब्रेड से कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।
हर दिन ब्रेड खाना पड़ सकता है भारी
Bread को लोग इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह झटपट तैयार हो जाती है और कई स्वादों में उपलब्ध है। बच्चे हों या बड़े, ब्रेड-जैम या ब्रेड-बटर से दिन की शुरुआत करना आम हो गया है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार ब्रेड खाने से कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं।
Bread में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो तेजी से ब्लड शुगर बढ़ा सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसमें फाइबर और विटामिन E की कमी के कारण कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ग्लूटेन और रिफाइंड कार्ब्स की अधिकता पाचन संबंधी दिक्कतें जैसे पेट दर्द, कब्ज और दस्त ला सकती है। साथ ही कैलोरी और कार्ब्स अधिक होने से वजन तेजी से बढ़ सकता है। ब्रेड में डाले जाने वाले प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल्स पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालते हैं।
ब्रेड और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
Bread में मौजूद ग्लूटेन और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट डिप्रेशन, स्ट्रेस और ध्यान की कमी जैसी मानसिक परेशानियों की वजह बन सकते हैं। इसके लगातार सेवन से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिससे मस्तिष्क के कार्यों पर असर पड़ता है।
‘ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम’ का खतरा
रोज Bread खाने से एक दुर्लभ मानसिक स्थिति ‘ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम’ हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को बिना शराब पिए नशे जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ब्रेड में मौजूद खमीर पेट में जाकर फर्मेंटेशन के जरिए इथेनॉल (शराब) का निर्माण करने लगता है।
बचाव के उपाय
- रोजाना ब्रेड न खाएं, इसकी जगह घर में बनी रोटी, पोहा, उपमा या दलिया को शामिल करें।
- ताजे फल, अंकुरित अनाज और दालें अधिक खाएं, इनमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अधिक होते हैं।
- ब्रेड खरीदते समय लेबल ध्यान से पढ़ें और होल व्हीट या मल्टीग्रेन ब्रेड को प्राथमिकता दें।
- पेट या मानसिक परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।