Tuesday, August 11, 2026

Bodhana Sivanandan: 11 साल की भारतीय मूल की बोधना ने रचा इतिहास, बनीं ब्रिटेन की सबसे युवा महिला शतरंज चैंपियन

by Neha
Bodhana Sivanandan: 11 साल की भारतीय मूल की बोधना ने रचा इतिहास, बनीं ब्रिटेन की सबसे युवा महिला शतरंज चैंपियन

Bodhana Sivanandan: 11 वर्षीय भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन ने 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में महिला खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।

Bodhana Sivanandan: भारतीय मूल की 11 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर इतिहास रच दिया है। बोधना ने 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बन गई हैं।

कोवेंट्री में आयोजित प्रतियोगिता में बोधना का मुकाबला आयरलैंड की 14 वर्षीय ट्रिशा कन्यामराला से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर के बाद मुकाबला रैपिड टाई-ब्रेक तक पहुंचा, जहां बोधना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।

लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ था शतरंज का सफर

बोधना शिवानंदन की शतरंज से जुड़ने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में पहली बार शतरंज खेलना शुरू किया था।

उस दौरान उनके पिता के एक दोस्त भारत लौट रहे थे। उन्होंने बोधना के परिवार को कुछ सामान दिया, जिसमें शतरंज की बिसात भी शामिल थी। बोधना को शतरंज के मोहरों में काफी दिलचस्पी हुई और उन्होंने इस खेल को सीखना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बेहद कम समय में शतरंज की दुनिया में पहचान बना ली।

11 साल की उम्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि

बोधना ने बहुत कम उम्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां अपने नाम की हैं। वह तेज फॉर्मेट में ब्रिटिश महिला ब्लिट्ज चैंपियन और ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन का खिताब भी जीत चुकी हैं। अब क्लासिकल शतरंज में ब्रिटिश महिला चैंपियन बनकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ा खिताब जोड़ लिया है।

ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में बोधना को सिर्फ एक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया।

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ग्रैंडमास्टर भी बोधना की प्रतिभा के कायल

बोधना की असाधारण प्रतिभा ने शतरंज जगत के कई बड़े खिलाड़ियों और विशेषज्ञों को प्रभावित किया है। उनकी कम उम्र और खेल की समझ को देखते हुए उन्हें भविष्य की बड़ी शतरंज प्रतिभाओं में गिना जा रहा है।

ब्रिटिश चैंपियनशिप के दौरान भी उनकी जीत पर कमेंट्री कर रहे ग्रैंडमास्टर डैनी गोरमली उनकी प्रतिभा से बेहद प्रभावित नजर आए। उन्होंने बोधना को एक असाधारण और पीढ़ी में एक बार मिलने वाली प्रतिभा बताया।

श्रेयस रॉयल ने भी रचा इतिहास

2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में बोधना के साथ भारतीय मूल के एक और युवा खिलाड़ी श्रेयस रॉयल ने भी इतिहास रचा। 17 वर्षीय श्रेयस ने ओपन वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। नौ राउंड के मुकाबलों के बाद उन्होंने तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया और अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला ब्रिटिश चैंपियनशिप खिताब जीता।

श्रेयस पहले भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने महज 15 साल की उम्र में इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड बनाया था।

तीन साल की उम्र में भारत से ब्रिटेन गए थे श्रेयस

श्रेयस रॉयल का जन्म भारत में हुआ था। वह सिर्फ तीन साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ भारत से ब्रिटेन चले गए थे।

शतरंज में उनकी असाधारण प्रतिभा सामने आने के बाद उनके परिवार के ब्रिटेन में रहने को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ब्रिटेन में उनके भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया गया। अब ब्रिटिश चैंपियनशिप जीतकर श्रेयस ने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।

बोधना और श्रेयस ने बढ़ाया भारतीय मूल के खिलाड़ियों का गौरव

2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप भारतीय मूल के खिलाड़ियों के लिए बेहद खास रही। एक ही प्रतियोगिता में बोधना शिवानंदन और श्रेयस रॉय ने अपने-अपने वर्ग में खिताब जीतकर सुर्खियां बटोरीं।

जहां 11 साल की बोधना ब्रिटेन की सबसे युवा महिला शतरंज चैंपियन बनीं, वहीं 17 वर्षीय श्रेयस ने ओपन वर्ग का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। दोनों खिलाड़ियों की सफलता यह बताती है कि युवा भारतीय मूल की प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय शतरंज में तेजी से अपनी जगह बना रही हैं।

2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का आयोजन भी रहा खास

2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप को प्रतियोगिता के 122 साल के इतिहास के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल किया गया। इस संस्करण में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इतने बड़े आयोजन में दो भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों का अपने-अपने वर्ग में चैंपियन बनना इस प्रतियोगिता की सबसे खास बातों में से एक रहा।

बोधना शिवानंदन की उपलब्धियां एक नजर में

उम्र: 11 साल
खिताब: ब्रिटिश महिला चेस चैंपियन
प्रतिद्वंद्वी: ट्रिशा कन्यामराला
निर्णायक मुकाबला: रैपिड टाई-ब्रेक
शतरंज की शुरुआत: कोविड लॉकडाउन के दौरान
मूल: भारतीय

खास रिकॉर्ड: ब्रिटेन की सबसे युवा महिला शतरंज चैंपियन

बोधना शिवानंदन की यह उपलब्धि उनके शानदार शतरंज सफर की शुरुआत मानी जा रही है। महज 11 साल की उम्र में ब्रिटिश चैंपियन बनने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें इस युवा प्रतिभा के भविष्य पर रहेंगी।

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