आशा दशमी व्रत 24 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। जानें इसका महत्व, पूजा विधि, व्रत नियम और सुखी वैवाहिक जीवन में इसकी धार्मिक मान्यता।
आशा दशमी व्रत 2026 में 24 जुलाई को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा सुखी वैवाहिक जीवन और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां पार्वती और दस दिशाओं की देवियों की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
आशा दशमी 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को सुबह 7:03 बजे होगी और इसका समापन 24 जुलाई 2026 को सुबह 9:12 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार आशा दशमी का व्रत 24 जुलाई, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
क्यों मनाया जाता है आशा दशमी व्रत
आशा दशमी व्रत को इच्छाओं की पूर्ति और सुखी दांपत्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां पार्वती और दस दिशाओं की देवियों की पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
यह भी कहा जाता है कि जिन महिलाओं के पति दूर रहते हैं, उनके पुनर्मिलन और संबंधों में मजबूती की संभावना इस व्रत से बढ़ती है।
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आशा दशमी पूजा विधि
इस व्रत की शुरुआत सुबह स्नान और शुद्ध मन से संकल्प लेने के साथ होती है। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके लाल कपड़ा बिछाया जाता है और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
पूजा में रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप और खीर का भोग लगाया जाता है। इस दौरान आशा देवियों की पूजा की जाती है और व्रत कथा का श्रवण या पाठ अनिवार्य माना जाता है। पूजा के बाद दान करने और सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
व्रत के नियम
आशा दशमी व्रत को लगातार छह महीने से लेकर एक-दो वर्ष तक करने का विधान है। व्रत का उद्यापन विधि अनुसार किया जाता है। इस दिन रात्रि जागरण, दान-पुण्य और सुहागिन महिलाओं के साथ मिलकर पूजा करना शुभ माना जाता है।