राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान का दौरा कर प्रोजेक्ट चीता की प्रगति का जायजा लिया। इसके साथ ही उनका पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा संपन्न हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मध्य प्रदेश की अपनी पांच दिवसीय यात्रा का समापन किया। दौरे के अंतिम चरण में उन्होंने श्योपुर स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया, जहां प्रोजेक्ट चीता के तहत चल रहे संरक्षण और पुनर्वास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद वह ग्वालियर से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
चीता संरक्षण प्रयासों का लिया जायजा
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में राष्ट्रपति ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का दौरा किया। यहां अधिकारियों ने उन्हें चीतों की निगरानी, ट्रैकिंग और संरक्षण के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने उस विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक हुई उपलब्धियों और संरक्षण प्रयासों को प्रदर्शित किया गया था। यह परियोजना भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को दोबारा स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है।
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ग्वालियर से दिल्ली के लिए रवाना हुईं राष्ट्रपति
कुनो राष्ट्रीय उद्यान के दौरे के बाद राष्ट्रपति ग्वालियर पहुंचीं, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं। ग्वालियर हवाई अड्डे पर राज्यपाल, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें विदाई दी।
बोत्सवाना से आए चीतों से जुड़ा विशेष संबंध
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि उन्होंने वर्ष 2025 में बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के दौरान वहां से भारत को सौंपे गए आठ चीतों के प्रतीकात्मक हस्तांतरण को देखा था। बाद में इन चीतों को फरवरी 2026 में कुनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया।
प्रोजेक्ट चीता से मजबूत हो रहा वन्यजीव संरक्षण
सितंबर 2022 में शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के माध्यम से पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करना है। अनुकूल पर्यावास, पर्याप्त शिकार आधार और कम मानवीय हस्तक्षेप के कारण कुनो राष्ट्रीय उद्यान को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चुना गया।
अब तक नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से कई चीतों को भारत लाया जा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव पुनर्वास के क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।