Iron Ring Astrology: ज्योतिष शास्त्र में लोहे का छल्ला (Iron Ring) शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही नियम और सही उंगली में पहना जाए। गलत तरीके से पहनने पर इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है।
किस उंगली में पहनना चाहिए लोहे का छल्ला?
ज्योतिष के अनुसार लोहे का छल्ला हमेशा दाएं हाथ की मध्यमा उंगली (Middle Finger) में पहनना सबसे शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस उंगली का सीधा संबंध शनि ग्रह से होता है, इसलिए इसका प्रभाव अधिक होता है। अगर किसी कारणवश दाएं हाथ में पहनना संभव न हो, तो इसे बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में भी पहना जा सकता है।
पहनने का सही दिन और समय
लोहे का छल्ला पहनने के लिए शनिवार या अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दोनों दिन शनिदेव को समर्पित होते हैं। इसे प्रदोष काल यानी शाम के समय धारण करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
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लोहे का छल्ला पहनने की सही विधि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार छल्ला पहनने से पहले कुछ धार्मिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले इसे सरसों के तेल में कुछ समय के लिए रखा जाता है। इसके बाद “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। फिर इसे गंगाजल से शुद्ध करके शनिदेव के सामने रखा जाता है और शनि चालीसा का पाठ किया जाता है। पूजा के बाद इसे मध्यमा उंगली में धारण किया जाता है।
किन लोगों को पहनना चाहिए लोहे का छल्ला?
यह छल्ला उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष का प्रभाव हो। हालांकि, इसे पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि किसी नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।
लोहे के छल्ले के संभावित फायदे
मान्यता है कि सही विधि से लोहे का छल्ला पहनने पर शनि के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। इससे जीवन में रुकावटें धीरे-धीरे कम होती हैं और करियर व बिजनेस में सुधार देखने को मिलता है। यह मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक सोच को कम करने में भी सहायक माना जाता है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार और पैसों की तंगी में राहत मिलने की भी मान्यता है।