Tuesday, May 12, 2026

बगलामुखी जयंती 2026: बगलामुखी जयंती कब है, महत्व, पूजा विधि और लाभ जानें पूरी जानकारी

by Neha
बगलामुखी जयंती 2026: बगलामुखी जयंती कब है, महत्व, पूजा विधि और लाभ जानें पूरी जानकारी

बगलामुखी जयंती 2026 25 अप्रैल को मनाई जाएगी। जानें पूजा मुहूर्त, विधि, मंत्र, लाभ और मां बगलामुखी के मंदिर की पूरी जानकारी।

बगलामुखी जयंती 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। 10 महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाने वाली मां बगलामुखी की पूजा शक्ति, वाणी, बुद्धि और शत्रु पर विजय दिलाने वाली मानी जाती है। मान्यता है कि उनकी साधना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

बगलामुखी जयंती 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

मां बगलामुखी कौन हैं?

मां बगलामुखी को पीतांबरा, बगला देवी, वल्गामुखी और ब्रह्मास्त्र विद्या के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें वाणी, वाक्पटुता और नियंत्रण की शक्ति की देवी माना जाता है। विशेष रूप से तांत्रिक साधना में इनकी पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

बगलामुखी जयंती 2026 पूजा मुहूर्त

  • सुबह पूजा मुहूर्त: सुबह 5:47 से 10:41 बजे तक
  • तांत्रिक पूजा सामान्यतः रात्रि में की जाती है, लेकिन इसे केवल गुरु या विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

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मां बगलामुखी पूजा के लाभ

मां बगलामुखी की पूजा से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे:

  • शत्रुओं पर विजय
  • कोर्ट-कचहरी मामलों में सफलता
  • विवादों में जीत
  • वाणी में प्रभावशीलता
  • दरिद्रता और बाधाओं का नाश

बगलामुखी पूजा विधि

मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान इन बातों का पालन करें:

  • स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें
  • मां को पीले फूल, हल्दी, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें
  • केला या हलवे का भोग लगाएं
  • “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का जाप करें
  • अंत में आरती कर अपनी मनोकामना प्रार्थना करें

मां बगलामुखी का विशेष मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।

मां बगलामुखी और भैरव पूजा

शक्ति साधना में भैरव पूजा का भी विशेष महत्व है। मां बगलामुखी के भैरव को मृत्युंजय भैरव माना जाता है। साधक “हौं जूं स:” मंत्र का जाप कर सकते हैं।

मां बगलामुखी की पौराणिक कथा

मान्यता है कि एक बार ब्रह्मांडीय प्रलय के समय जब संपूर्ण सृष्टि संकट में थी, तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव का स्मरण किया। इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या की और उसी से मां बगलामुखी प्रकट हुईं, जिन्होंने उस विनाशकारी तूफान को शांत किया।

मां बगलामुखी के प्रमुख मंदिर

भारत में मां बगलामुखी के प्रमुख सिद्धपीठ स्थित हैं:

  • बनखंडी (हिमाचल प्रदेश)
  • नलखेड़ा (मध्य प्रदेश)
  • दतिया (मध्य प्रदेश)

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