Saturday, August 15, 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 शुरू, इस बार नवरात्रि केवल 8 दिन की, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

by Versha
चैत्र नवरात्रि 2026 शुरू, इस बार नवरात्रि केवल 8 दिन की, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च से शुरू। जानें क्यों इस बार नवरात्रि 8 दिन की है, शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना और विशेष उपाय।

19 मार्च 2026, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इस दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का उत्सव भी मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य सुरेश श्रीमाली के अनुसार, इस नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा केवल संकटों से बचने के लिए नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को जागृत करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चैत्र नवरात्रि 2026 इस बार 8 दिन की क्यों है

इस वर्ष नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि अमावस्या में पड़ रही है। इस कारण पहली तिथि में क्षय होने का योग बन रहा है और इस बार नवरात्रि केवल आठ दिन की होगी। माता की सवारी डोली में होने के कारण यह पर्व और भी विशेष बन जाता है। नवरात्रि के इन आठ दिनों में पूजा-अर्चना करने से परिवार की समृद्धि, सुख-शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

विक्रम संवत 2083 और ग्रहों का प्रभाव

विक्रम संवत 2083 के अनुसार इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति, मंत्री मंगल ग्रह और सेनापति शनिदेव हैं। ग्रहों का यह संयोग ज्ञान, अनुशासन और साहस की वृद्धि का संकेत देता है। इस वर्ष नवरात्रि के दौरान किए गए संकल्पों और पूजा से जीवन में स्थिरता, सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त होती है।

तिथि, नक्षत्र और शुभ योग

चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सूर्योदय के बाद प्रारंभ होगी और 20 मार्च सूर्योदय से पहले समाप्त होगी। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संगम बन रहा है। यह योग संकल्पों को सिद्ध करने और कार्यों में सफलता पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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कलश स्थापना और पूजा विधि

नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इस वर्ष कलश स्थापना का प्रथम मुहूर्त सुबह 06:53 से 08:17 तक अत्यंत शुभ रहेगा। इसके बाद सुबह 11:16 से दोपहर 12:46 तक चंचल मुहूर्त और दोपहर 12:22 से 01:10 तक अभिजीत मुहूर्त में पूजा की जा सकती है।

कलश स्थापना में सबसे पहले कलश में शुद्ध जल, गंगाजल, दूब, कुशा, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते सजाएं और अक्षत से भरे नारियल को चुनरी में लपेटकर कलश पर रखें। इसके बाद वरुण देवता का आह्वान करें और कुमकुम से स्वास्तिक बनाकर इसे बाईं ओर स्थापित करें। साथ ही मिट्टी के पात्र में बोया गया जौ नौ दिनों में अंकुरित होकर आने वाले वर्ष की खुशहाली का संकेत देगा। नवमी के बाद अंकुरित जौ को तिजोरी या कार्यस्थल में रखने से सौभाग्य और धन-धान्य का मार्ग प्रशस्त होता है।

विशेष उपाय और महासंयोग

नवरात्रि के दौरान विशेष उपाय करने से कार्यों में सफलता और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। 19, 20, 23, 25 और 26 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग में लाल कपड़े में पीली सरसों और चांदी का सिक्का माता के पास रखें। 19 मार्च को शुक्ल योग में माता को लाल चंदन अर्पित करना और सूर्य को जल देना सामाजिक मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ाने में सहायक होगा। वहीं 20 मार्च को सर्वाअमृत योग में मां को दूध और शहद का भोग अर्पित करने से स्वास्थ्य की रक्षा और समृद्धि में वृद्धि होगी।

चैत्र नवरात्रि 2026 का समापन और संदेश

इस चैत्र नवरात्रि का समापन 26 मार्च को श्रीराम नवमी के महापर्व के साथ होगा। इस अवसर पर संकल्प लें कि आप अपने विचार और आहार दोनों को शुद्ध रखेंगे, क्योंकि शुद्ध विचार और संयमित आहार जीवन में वास्तविक सिद्धि और चमत्कार ला सकते हैं। नवरात्रि का यह पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दर्शाता है, बल्कि परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ाने का भी श्रेष्ठ अवसर है।

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