“पंजाब किंग्स के हाथों चेन्नई की हार के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की जड़ में वह नो बॉल है, जो महेंद्र सिंह Dhoni से जुड़ी हुई है। यह घटना मैच के दौरान CSK की पारी के 18वें ओवर में घटी थी।”
8 अप्रैल को अपने होम ग्राउंड पर खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 18 रन से शिकस्त दी। इस हार के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जो एक नो बॉल को लेकर है और जिसके केंद्र में Dhoni हैं। धोनी ने इस मैच में 225 की स्ट्राइक रेट से केवल 12 गेंदों पर 27 रन जड़ दिए। वे 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और CSK की ओर से सबसे तेज़ स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज़ रहे। हालांकि, उनकी इस धमाकेदार पारी के दौरान हुई एक घटना ने IPL के आयोजकों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और CSK फैंस को नाराज़ कर दिया है।
नो बॉल की घटना कब और कैसे हुई?
अब सवाल उठता है कि इस नो बॉल का असली मामला क्या है। यह वाकया चेन्नई की पारी के 18वें ओवर की आखिरी गेंद पर हुआ। लॉकी फर्ग्युसन की डाली गई एक हाई फुल टॉस गेंद पर Dhoni ने छक्का जड़ा। फील्ड अंपायर ने उस गेंद को नो बॉल करार दिया, जिसके बाद फैसला समीक्षा के लिए थर्ड अंपायर के पास भेजा गया।
Dhoni के साथ हुआ अन्याय?
थर्ड अंपायर ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए गेंद की ऊंचाई और धोनी की कमर की ऊंचाई की जांच की और निष्कर्ष निकाला कि वह गेंद नियमों के तहत वैध थी। यानी वह नो बॉल नहीं थी। अंपायर के मुताबिक गेंद धोनी की कमर की ऊंचाई 1.01 मीटर से नीचे, करीब 0.98 मीटर पर थी। इसके चलते फील्ड अंपायर को अपना फैसला पलटना पड़ा।
फैसले से नाराज़ फैंस
हालांकि, CSK के फैंस इस निर्णय से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने सोशल मीडिया पर IPL के आयोजकों पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। फैंस का मानना है कि वह गेंद साफ तौर पर नो बॉल थी। एक यूज़र ने तो इसे नो बॉल न देने को 2025 का सबसे बड़ा घोटाला तक करार दे दिया। ये तमाम प्रतिक्रियाएं एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मुफ्फदल वोहरा की पोस्ट के कमेंट सेक्शन में देखने को मिलीं।