Saturday, September 5, 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ कार्यशाला का उद्घाटन किया, बोले – आपदा प्रबंधन सभी की जिम्मेदारी

by Neha
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ कार्यशाला का उद्घाटन किया, बोले – आपदा प्रबंधन सभी की जिम्मेदारी

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ कार्यशाला का उद्घाटन किया। आधुनिक तकनीक और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन के माध्यम से राज्य को सुरक्षित बनाने पर जोर।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम में आयोजित ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शीतलहर, बाढ़ और हवाई यातायात सहायता के लिए एसओपी, नववर्ष 2026 का आपदा प्रबंधन कैलेंडर और आपदा प्रबंधन पुस्तिका का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यशाला में कहा कि आपदा प्रबंधन कोई एक विभाग का काम नहीं, बल्कि सभी प्रशासनिक इकाइयों, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ड्रोन सर्विलांस, GIS मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

युवा आपदा मित्रों को सम्मान और एसबीआई वाहनों का फ्लैग ऑफ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा आपदा मित्रों और वर्ष 2025 में राहत एवं बचाव कार्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया। इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा उपलब्ध कराए गए चार वाहन का फ्लैग ऑफ भी किया गया।

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हिमालयी प्रदेश में आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (Avalanche) और अत्यधिक हिमपात गंभीर प्राकृतिक जोखिम हैं। राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन और पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है, प्रशिक्षित रेस्क्यू बल तैनात किए जा रहे हैं और सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को प्रभावी बनाया जा रहा है।

शीतलहर से निपटने के लिए ठोस कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक ठंड और हिमपात के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू और निमोनिया के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा जाएगा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जरूरी दवाइयों, हीटिंग उपकरण और प्राथमिक उपचार सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन

धामी ने कहा कि सरकार ‘युवा आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ जैसी पहल को और सशक्त बनाने पर काम कर रही है ताकि समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन मजबूत हो। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला शीत ऋतु के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाएगी।

प्रशासनिक अधिकारी और विशेषज्ञ भी मौजूद

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि शीतलहर का प्रभाव धीरे-धीरे दिखता है, लेकिन इसका असर गंभीर हो सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य, आईजी गढ़वाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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