Saturday, April 18, 2026

Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath : कुंभ सहायक चैटबॉट के जरिए 11 भाषाओं में संवाद की सुविधा प्रदान की गई है।

by editor
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath : कुंभ सहायक चैटबॉट के जरिए 11 भाषाओं में संवाद की सुविधा प्रदान की गई है।

Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath ने कहा कि महाकुंभ का आयोजन किसी विशेष पार्टी या सरकार का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का है। सरकार इस आयोजन में श्रद्धालुओं के सहयोग और अपने उत्तरदायित्वों को निभाने के लिए तत्परता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारियों का गहरा एहसास है और भारत की सनातन परंपराओं के प्रति अपार श्रद्धा है। श्रद्धालुओं का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है और प्रदेश सरकार को इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

CM Yogi ने विधान सभा सत्र के दौरान कहा कि आयोजन के संबंध में अनेक प्रकार के दुष्प्रचार किए गए, लेकिन देश और दुनिया ने इसमें सहभागिता निभाकर इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ के समाप्त होने में अभी सात दिन शेष हैं और अब तक 56 करोड़ 25 लाख से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज में संगम में स्नान कर चुके हैं।

CM Yogi ने 29 जनवरी की भगदड़ में हताहत लोगों तथा सोनभद्र, अलीगढ़ या अन्य स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं के शिकार श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार प्रभावित परिवारों की हर संभव सहायता करेगी और इस विषय पर राजनीति करना अनुचित होगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रति आस्था रखना या उसके आयोजनों को भव्य रूप देना कोई अपराध नहीं है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाकुंभ में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया। क्रिकेटर मोहम्मद शमी सहित हर जाति, मत और धर्म के लोगों ने इसमें भाग लिया और आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति का इलाज संभव है, लेकिन संक्रमित सोच का उपचार कठिन है। प्रत्येक महान कार्य उपहास, विरोध और स्वीकृति के चरणों से गुजरता है।

CM Yogi ने कहा कि ऋग्वेद में कुंभ की परंपरा का उल्लेख किया गया है— “कुंभं समारोह्य सुधां पिबेत” अर्थात कुंभ के अमृत को ग्रहण कर आत्मा को आनंदित करें। अथर्ववेद में भी इसे गंगाजल के अमृत तुल्य बताया गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीरामचरितमानस सहित कई प्राचीन ग्रंथों में महाकुंभ की महिमा का वर्णन किया गया है।

उन्होंने प्रदेशवासियों को इस भव्य आयोजन से जुड़ने पर गर्व करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भले ही हम अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हों, लेकिन प्रदेश से बाहर हमारी पहचान उत्तर प्रदेश के नागरिक के रूप में होती है। यदि हम अच्छा कार्य करेंगे तो सम्मान मिलेगा, अन्यथा लोग नकारात्मक दृष्टि से देखेंगे। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की छवि अलग थी, लेकिन अब प्रदेश ने अपनी पहचान को बेहतर किया है।

CM Yogi ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश की छवि बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके परिणामस्वरूप आज प्रदेशवासियों को देश और दुनिया में सम्मान मिल रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कोविड प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा था, तब विरोधियों ने इसका उपहास उड़ाया। इसी तरह, जब 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्री रामलला विराजमान हुए, तब भी कुछ लोगों ने इसका विरोध किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2013 में आयोजित कुंभ 55 दिनों तक चला था, जबकि 2025 में होने वाला महाकुंभ 45 दिनों का होगा। आयोजन की तिथि धार्मिक परंपराओं के अनुसार तय की जाती है, जो पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक निर्धारित रहती है। 2013 के कुंभ का क्षेत्रफल 1936 हेक्टेयर था, जबकि इस बार 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। पहले कुंभ को 14 सेक्टर्स में विभाजित किया गया था, जबकि इस बार 25 सेक्टर्स में बांटा गया है। 2013 में 635 हेक्टेयर में पार्किंग सुविधा उपलब्ध थी, जबकि इस बार इसे बढ़ाकर 1850 हेक्टेयर कर दिया गया है।

CM Yogi  ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से शहर के विकास को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। 2013 के कुंभ के दौरान प्रयागराज में कोई आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज), पक्के घाट या रिवरफ्रंट का निर्माण नहीं हुआ था, जबकि 2019 में प्रदेश सरकार ने नौ आरओबी और छह अंडरपास बनाए। महाकुंभ 2025 के लिए प्रयागराज में 14 नए फ्लाईओवर, नौ पक्के घाट और सात रिवरफ्रंट मार्गों का निर्माण किया गया है। 2013 में केवल चार किलोमीटर का अस्थायी घाट था, जिसे इस बार बढ़ाकर 12 किलोमीटर किया गया है।

यातायात सुविधाओं के संदर्भ में CM Yogi ने बताया कि 2013 में एक भी शटल बस नहीं थी, जबकि इस बार 550 से अधिक शटल बसें श्रद्धालुओं को कुंभ क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए चलाई जा रही हैं। 2013 में कुल 2300 रोडवेज बसें खरीदी गई थीं, जबकि इस बार 7000 बसों की व्यवस्था की गई है। बस स्टैंड की संख्या भी तीन से बढ़ाकर सात कर दी गई है। सड़क चौड़ीकरण के तहत 2013 में केवल 55 सड़कों का विस्तार किया गया था, जबकि 2019 में 125 सड़कों को टू-लेन से फोर-लेन और फोर-लेन से छह-लेन में बदला गया। 2025 तक 200 से अधिक सड़कों को इस सुविधा से जोड़ा गया है।

जल गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए CM Yogi ने कहा कि 2013 में बायोरेमेडिएशन की सीमित व्यवस्था के कारण कुंभ में स्वच्छता की समस्याएं उत्पन्न हुई थीं, जबकि 2025 के महाकुंभ में 81 नालों को टैप कर 261 एमएलडी जल को एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और बायोरेमेडिएशन तकनीक से शुद्ध किया जा रहा है। उपचारित जल को ही आगे प्रवाहित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार जल की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार संगम क्षेत्र और उसके आसपास जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) तीन या उससे कम है, जबकि घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा 8-9 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई है। यानी संगम का जल स्नान और आचमन के लिए उपयुक्त है। प्रयागराज में 12, 16, 20, 25, 30 जनवरी और 5, 10, 13 फरवरी को लिए गए जल नमूनों में फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा भी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई है।

CM Yogi ने कहा कि महाकुंभ में देश के आम नागरिकों से लेकर उद्योगपतियों, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों तक ने स्नान किया। देश-विदेश के प्रतिष्ठित हस्तियां भी प्रयागराज पहुंच रही हैं। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। समाज के सभी वर्गों का प्रयागराज की ओर बढ़ता रुझान इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है। इसे व्यापक रूप से प्रचारित करना और प्रदेश की इस उपलब्धि को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना आवश्यक है। जो भी श्रद्धालु और पर्यटक महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वे यहां की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं, जल की स्वच्छता, आयोजन की भव्यता और एकता की भावना की सराहना कर रहे हैं। यह किसी विशेष वर्ग का तुष्टीकरण नहीं, बल्कि 56 करोड़ श्रद्धालुओं को संतोषप्रद अनुभव देने का प्रयास है। यह आयोजन भारत की ताकत को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रहा है और उत्तर प्रदेश की क्षमता को पूरे देश में मान्यता दिला रहा है।

CM Yogi ने कहा कि महाकुंभ के आयोजन से यह साबित होता है कि उत्तर प्रदेश इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कर सकता है, और विशेष रूप से प्रयागराज इस ऐतिहासिक आयोजन को पूर्णता देने की क्षमता रखता है। प्रदेशवासियों के लिए यह गौरव की बात है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं। इसी तरह, वाराणसी और अयोध्या में भी प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश के प्रति एक नई सकारात्मक धारणा बन रही है। अयोध्या आने वाले लोग आध्यात्मिक रूप से पुण्य प्राप्त कर रहे हैं और साथ ही यहां की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

CM Yogi ने आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोगों ने यह अफवाह फैलाई कि महाकुंभ में श्रद्धालु भूखे रह गए, जबकि सनातन धर्म के आयोजनों में कोई भी भूखा नहीं रहता। हम माता अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं और उनकी कृपा से दूसरों को भोजन कराने की सामर्थ्य रखते हैं। प्रयागराज महाकुंभ में जो भी आया, उसे अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिला। वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में लगातार सेवा कार्य चल रहे हैं, और इन शहरों ने “अतिथि देवो भवः” की परंपरा का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है।

CM Yogi ने बताया कि महाकुंभ मेले की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने संयुक्त रूप से सात से साढ़े सात हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें से 1500 करोड़ रुपये महाकुंभ आयोजन के लिए, जबकि शेष प्रयागराज और उसके आसपास के बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किए गए हैं। नौ रेलवे स्टेशनों का विस्तार और आधुनिकीकरण किया गया है, जहां होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। प्रयागराज एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल का विस्तार किया गया है, जिससे पहले जहां केवल दो एयरोड्रम थे, अब वहां छह एयरोड्रम बनाए गए हैं, जो एक साथ छह विमानों को खड़ा करने में सक्षम हैं। अब तक 750 से अधिक नियमित और चार्टर्ड उड़ानें प्रयागराज में उतर चुकी हैं।

रेलवे की भूमिका की सराहना करते हुए CM Yogi ने कहा कि महाकुंभ के दौरान भारतीय रेलवे ने 3,000 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जिनके 13,000 से अधिक फेरे प्रयागराज के लिए लगाए गए हैं। 10 स्थानों पर होल्डिंग एरिया भी विकसित किए गए हैं। केंद्रीय रेल मंत्री स्वयं इस कार्य का समन्वय कर रहे हैं, जबकि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, डीआरएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पूरी तत्परता से इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे का पूरा सहयोग मिला है। स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच मजबूत समन्वय के कारण महाकुंभ का आयोजन भव्यता और दिव्यता के साथ आगे बढ़ रहा है।

CM Yogi ने बताया कि महाकुंभ के दौरान व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिसमें डेढ़ लाख से अधिक टेंट, उतने ही शौचालय, लगभग 500 किलोमीटर लंबी चेकर्ड प्लेट, 30 पांटून पुल, 2,000 से अधिक चेंजिंग रूम, 67,000 से अधिक विद्युत पोल और स्ट्रीट लाइट्स शामिल हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 125 एंबुलेंस, 7 रिवर एंबुलेंस, एक एयर एंबुलेंस और 20,000 से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं। सफाई और टॉयलेट्स की निगरानी के लिए 2,500 गंगा दूत और घाट प्रबंधन में सहायता के लिए 5,000 कुंभ सेवा मित्रों की नियुक्ति की गई है। इसके अतिरिक्त, 10,000 अन्य कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 75,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया है। साथ ही, 2,700 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, 20 ड्रोन कैमरे और 6 लाख वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जो 5,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1,250 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है, और आग से सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एसडीआरएफ के माध्यम से जल पुलिस का एक नया बेड़ा प्रयागराज को प्रदान किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के प्रयास किए गए हैं। पहली बार महाकुंभ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग किया गया है, जिसमें कुंभ सहायक चैटबॉट के माध्यम से 11 भाषाओं में संवाद की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। गूगल के साथ हुए समझौते के तहत श्रद्धालुओं को सभी सेक्टरों के मार्ग और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है। इसके अलावा, क्यूआर कोड के जरिए भी लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। महाकुंभ की व्यापक जानकारी देने के लिए एक डिजिटल महाकुंभ एक्सपीरियंस सेंटर भी स्थापित किया गया है।

CM Yogi ने बताया कि प्रयागराज के अस्पतालों में 6,000 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, महाकुंभ में 360 बेड का एक बड़ा अस्पताल, अरैल और झूंसी में 25-25 बेड के दो अस्पताल, 20-20 बेड के दो अन्य अस्पताल और 10-10 बेड के कई अस्पताल स्थापित किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

CM Yogi ने वर्ष 2013 के प्रयागराज कुंभ की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस समय 55 दिनों तक चले आयोजन में करीब 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे, लेकिन इसे अव्यवस्था, हादसों और भ्रष्टाचार के कारण याद किया जाता है। उस दौरान एक बड़ी आगजनी की घटना भी हुई थी। वर्ष 2013 के कुंभ को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी बताया गया कि जब श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे, तब प्रशासन भ्रष्टाचार में लिप्त था।

तत्कालीन राज्य सरकार ने आयोजन के लिए खुद कोई विशेष धनराशि खर्च नहीं की, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए फंड से ही पूरा आयोजन संचालित किया गया। केंद्र सरकार ने कुंभ के लिए 1,141 करोड़ 63 लाख रुपये जारी किए थे, जबकि राज्य सरकार ने मात्र 10 करोड़ 57 लाख रुपये खर्च किए। मेला शुरू होने तक 59% निर्माण कार्य और 19% आपूर्ति संबंधी कार्य पूरे ही नहीं हुए थे। मेला प्रशासन ने 8.72 करोड़ रुपये खर्च करके दो घाटों का निर्माण कराया, जिनका कुंभ आयोजन से कोई संबंध नहीं था।

इसके अलावा, 111 निर्माण कार्यों में से 81 कार्य बिना तकनीकी स्वीकृति के कराए गए। सड़क चौड़ीकरण के लिए बिना परीक्षण के 57 करोड़ 41 लाख रुपये और उनकी मरम्मत के लिए 46 करोड़ 68 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इससे स्पष्ट होता है कि वर्ष 2013 का कुंभ भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का शिकार था, जबकि इस बार महाकुंभ को सुव्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से आयोजित किया गया है।

CM Yogi ने बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 करोड़ 1 लाख रुपये की सामग्री बिना किसी आवश्यकता के खरीदी गई थी। इसके अलावा, मशीनरी और ठेकेदारों को एडवांस भुगतान के नाम पर 23 ठेकेदारों को 4 करोड़ 65 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि एक ही ट्रैक्टर को एक समय में दो अलग-अलग स्थानों पर काम करते हुए दिखाया गया, वहीं 30 मजदूरों को भी एक ही समय में दो जगह कार्यरत बताया गया। ट्रैक्टरों की आपूर्ति से संबंधित अनुबंध में सभी कर शामिल होने के बावजूद दो ठेकेदारों को सेवा कर का अलग से भुगतान किया गया। शौचालयों की भारी कमी के कारण एक शौचालय का औसतन 900 लोगों ने प्रतिदिन उपयोग किया। कई जगहों पर महिला और पुरुष शौचालयों के बीच कोई विभाजन नहीं था, जिससे असुविधा हुई।

CM Yogi ने आगे बताया कि 2013 के कुंभ में 50% कल्पवासियों को बीपीएल कार्ड जारी किए गए, लेकिन ये कार्ड तब वितरित किए गए जब मेले की चार प्रमुख तिथियां पहले ही बीत चुकी थीं, जिससे लाभार्थियों को रियायती दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकी। जल आपूर्ति की गुणवत्ता जांचने के लिए हर हफ्ते पानी के नमूने लेने की व्यवस्था थी, लेकिन 201 में से सिर्फ 6 नलों का ही परीक्षण किया गया। इसके अलावा, स्नान घाटों पर चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं थी, और कई पांटून पुलों पर जल पुलिस व एंबुलेंस सेवाएं भी नहीं थीं। सीएजी की रिपोर्ट में सड़क चौड़ीकरण, घाट निर्माण, भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग सहित कई कार्यों में भ्रष्टाचार उजागर किया गया।

CM Yogi ने बताया कि प्रयागराज स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ने महाकुंभ की विशेषताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनुसार, इस आयोजन ने प्रत्येक भारतीय में एक नई आध्यात्मिक चेतना जाग्रत की है, जिससे श्रद्धालु अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करने के लिए महाकुंभ में आ रहे हैं। यह मेला न केवल विशालता और भव्यता का प्रतीक है, बल्कि इसमें विभिन्न विचारधाराओं, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं के लोग भाग ले रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सभ्यतागत धरोहर का प्रतीक बनकर उभरा है, जिससे पूरी दुनिया इसके प्रति जागरूक हुई है।

हिमालयन इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा कि इस मेले को इस स्तर तक पहुंचाने में भारी प्रयास किए गए हैं, जिसमें संसाधनों का बेहतर समन्वय और कुशल नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महाकुंभ को सफलता के शिखर पर पहुंचाने में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्कृष्ट कार्य किया है, जिसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। इस आयोजन ने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

CM Yogi ने बताया कि 1954 के कुंभ में 800 से अधिक श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई थी। यह दुखद घटना तब घटी थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आयोजन में शामिल हुए थे। 1974 और 1986 के कुंभ आयोजनों में भी सैकड़ों लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा कि जो लोग वर्तमान महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें इतिहास पर भी ध्यान देना चाहिए। इस बार आयोजन में किसी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं अपनाया गया है, अन्यथा 37-38 दिनों में 56 करोड़ लोग त्रिवेणी में स्नान नहीं कर पाते।

उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन जब दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ, उस समय मेला क्षेत्र में ही 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे, जबकि प्रयागराज शहर की अधिकतम क्षमता 25 लाख लोगों की है। उस दिन शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 2 करोड़ लोग पहुंचे थे, जिससे भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो गया। हालांकि, सरकार ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। 24 घंटे पहले जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, चित्रकूट, महोबा, फतेहपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ में होल्डिंग एरिया और पार्किंग सुविधाएं बनाई गईं, जिससे लगभग 2 लाख बसों को नियंत्रित किया गया। स्थानीय प्रशासन और जनता ने अतिथ्य सत्कार का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

CM Yogi ने बताया कि 29 जनवरी की रात 1:10 से 1:30 बजे के बीच संगम नोज के पास अचानक अत्यधिक भीड़ के दबाव से बैरिकेड्स टूट गए, जिससे वहां पहले से मौजूद श्रद्धालु दबाव में आ गए। इस घटना में 66 श्रद्धालु प्रभावित हुए, जिनमें से 30 की मृत्यु हो गई और 36 को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। मृतकों में 29 की पहचान कर शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए, जबकि एक अज्ञात मृतक का डीएनए सैंपल सुरक्षित रख प्रशासन ने अंतिम संस्कार कराया। घायलों में से 35 को उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि एक का इलाज स्थानीय मेडिकल कॉलेज में जारी है।

CM Yogi जी ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बचाव कार्य शुरू किया। श्रद्धालुओं ने ग्रीन कॉरिडोर बनाने में सहयोग दिया। पूरे दिन विभिन्न स्थानों पर भीड़ का दबाव बना रहा, जिससे अन्य जगहों पर भी 30-35 लोग घायल हुए, जिनमें से 07 की मृत्यु हो गई। हालांकि, अलीगढ़, झारखंड और नेपाल में हुई घटनाओं को प्रयागराज से जोड़कर दिखाया गया, जो अनुचित था। इसी तरह, कुछ दिन पहले प्रयागराज में एक सड़क दुर्घटना में 10 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई, जिसे महाकुंभ से जोड़ना गलत है। सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं, और प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।

CM Yogi ने कहा कि महाकुंभ के समापन में अभी एक सप्ताह शेष है, और अब तक 56 करोड़ श्रद्धालु इसमें भाग ले चुके हैं। यह आयोजन भारत की सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति की पहचान को दर्शाता है। देश-विदेश के लोग इसमें शामिल होकर अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और बताया कि उन्होंने अखाड़ों से अमृत स्नान को थोड़ी देर के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन पूरे दिन अमृत स्नान का मुहूर्त होने के कारण अखाड़ों ने श्रद्धालुओं को स्नान का अवसर प्रदान करने पर जोर दिया।

महाकुंभ में कुल 06 मुख्य स्नान हुए हैं, जिनमें से 03 अमृत स्नान थे। पहला स्नान 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर, दूसरा 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर और तीसरा 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर हुआ, जिसमें सभी 13 अखाड़ों ने भाग लिया। चौथा अमृत स्नान बसंत पंचमी पर संपन्न हुआ, जबकि पांचवां स्नान 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर हुआ। छठा और अंतिम स्नान 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर होगा। महाकुंभ की तिथियां ज्योतिष गणना के आधार पर तय होती हैं, न कि सरकार द्वारा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और संतों के सान्निध्य में महाकुंभ का यह आयोजन एकता का प्रतीक बन चुका है। यह आयोजन विभाजनकारी राजनीति का उत्तर है, और लोगों को महाकुंभ पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 22,000 से अधिक श्रद्धालु आयोजन के दौरान बिछड़े, जिनमें से 20,000 से अधिक को डिजिटल खोया-पाया केंद्र के माध्यम से उनके परिजनों से मिलाया गया।

CM Yogi ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन चुका है। इसकी तुलना में जर्मनी का ऑक्टोबर फेस्ट, ब्राजील का रियो कार्निवल और मक्का का हज आयोजन भी छोटा है। अभी तक 56 करोड़ लोग इस आयोजन में शामिल हो चुके हैं, जो कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ में कोई भूखा नहीं रह सकता, क्योंकि गुरुद्वारे, मठ और मंदिरों में नि:शुल्क लंगर की व्यवस्था है, जहां बिना भेदभाव के सभी का स्वागत किया जाता है।

उन्होंने भगदड़ और सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित लोगों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सरकार ने इन घटनाओं की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग गठित किया है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। महाकुंभ किसी पार्टी या सरकार का आयोजन नहीं है, बल्कि यह सभी की आस्था का प्रतीक है।

सदन में भाषाई विविधता का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि भोजपुरी, अवधी, बुंदेली जैसी बोलियों में बोलने की अनुमति दी गई है, और इनका हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराया जाएगा। हिंदी सदन की भाषा बनी रहेगी, और सभी को सकारात्मक भाव से इस कार्य में सहयोग देना चाहिए।

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