महिलाओं में टीबी क्यों बन रही साइलेंट किलर? जानें इसके लक्षण, कारण, खतरे और इलाज। Female Genital TB कैसे प्रभावित करती है प्रजनन क्षमता।
भारत में टीबी (Tuberculosis) को आमतौर पर फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाओं में यह बीमारी अब ‘साइलेंट किलर’ के रूप में सामने आ रही है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते और लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं।
क्या है टीबी और कैसे फैलती है?
टीबी एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो हवा के माध्यम से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या थूकता है, तो उसके जरिए बैक्टीरिया अन्य लोगों तक पहुंच सकते हैं। सही समय पर इलाज मिलने पर यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है, लेकिन लापरवाही होने पर यह गंभीर और जानलेवा बन सकती है।
महिलाओं में टीबी का खास रूप
महिलाओं में टीबी का एक विशेष प्रकार फीमेल जेनिटल टीबी होता है, जो प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है। यह बीमारी अधिक खतरनाक इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसके लक्षण आसानी से पहचान में नहीं आते और अक्सर देर से पता चलता है।
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किन अंगों पर होता है असर?
यह संक्रमण मुख्य रूप से इन अंगों को प्रभावित करता है:
- फेलोपियन ट्यूब
- गर्भाशय
- ओवरी
- सर्विक्स
सबसे अधिक प्रभाव फेलोपियन ट्यूब पर पड़ता है, जिससे गर्भधारण में समस्या आ सकती है। कई मामलों में यह बांझपन का कारण भी बन सकती है।
क्या हैं इसके लक्षण?
महिलाओं में टीबी के लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, जैसे:
- पेल्विक दर्द
- पीरियड्स में अनियमितता
- ज्यादा या कम ब्लीडिंग
- असामान्य डिस्चार्ज
इसके अलावा सामान्य टीबी के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
- लगातार बुखार
- रात में पसीना आना
- वजन कम होना
- भूख कम लगना
इन्हीं सामान्य लक्षणों की वजह से इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
किन महिलाओं में ज्यादा खतरा?
टीबी का जोखिम इन परिस्थितियों में अधिक होता है:
- कमजोर इम्यून सिस्टम
- डायबिटीज या HIV
- कुपोषण
- भीड़भाड़ वाले इलाके में रहना
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
समय पर इलाज क्यों जरूरी?
यदि समय रहते टीबी का इलाज न किया जाए, तो यह न केवल प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी खराब कर देती है। हालांकि, एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए इसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए पूरा इलाज कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी होता है।