इस Aerial Taxi की मदद से दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पाम जुमेरा तक का सफर सिर्फ 12 मिनट में तय किया जा सकेगा, जबकि कार से यही दूरी तय करने में करीब 45 मिनट लगते हैं।
बीते कुछ वर्षों से Aerial Taxi की अवधारणा पर काम चल रहा था, और अब दुबई ने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। शहर में एरियल टैक्सी की पहली परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। शहरी परिवहन के लिए यह एक क्रांतिकारी विकल्प बन सकता है। इसमें पूरी तरह इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) वाले एयरक्राफ्ट का उपयोग किया गया है, जिसे उड़ान भरने और उतरने के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होती।
यह Aerial Taxi जीरो-एमिशन के साथ तेज और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा का जरिया है। दुबई के क्राउन प्रिंस, उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम ने कहा कि यह उपलब्धि यूएई की उन्नत तकनीकों को अपनाने और भविष्य की दिशा में अग्रसर रहने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
टेस्ट में इस्तेमाल किए गए एयरक्राफ्ट की अधिकतम उड़ान रेंज 160 किलोमीटर और शीर्ष गति करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसके जरिए दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पाम जुमेरा तक की दूरी केवल 12 मिनट में तय की जा सकती है, जबकि पारंपरिक कार से यह सफर लगभग 45 मिनट लेता है।
Joby Aviation से साझेदारी और भविष्य की योजना:
Aerial Taxi परियोजना के लिए दुबई की रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) ने अमेरिकी कंपनी Joby Aviation के साथ साझेदारी की है। इस सेवा की व्यावसायिक शुरुआत अगले वर्ष तक हो सकती है। इसके लिए दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक विशेष स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है।
यह पहल दुबई इकोनॉमिक एजेंडा D33 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य की परिवहन व्यवस्थाओं के जरिए लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।
Joby Aviation के संस्थापक और CEO जोबेन् बेवर्ट का कहना है कि दुबई वैश्विक मोबिलिटी क्रांति का प्रमुख केंद्र बन रहा है। उनके अनुसार, यह उड़ान विश्वभर में एरियल टैक्सी को दैनिक जीवन में शामिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
दुबई दुनिया का पहला ऐसा शहर बन गया है जिसने एडवांस वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग तकनीक के साथ एयर मोबिलिटी सेवाओं की शुरुआत की है। हालांकि, चीन की EV निर्माता Xpeng ने भी करीब तीन साल पहले दुबई में अपनी ‘X2 फ्लाइंग कार’ की टेस्टिंग की थी, लेकिन वह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। कई अन्य देश भी फ्लाइंग कार की दिशा में काम कर रहे हैं।