Fatty Liver की परेशानी आजकल युवाओं में भी तेजी से फैल रही है, जैसे किसी महामारी का रूप ले चुकी हो। इसके पीछे सबसे बड़े कारण हैं—लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, डेस्क जॉब्स, असंतुलित भोजन और खराब जीवनशैली।
आज के समय में युवाओं के बीच एक नई परेशानी तेजी से पांव पसार रही है – Fatty Liver। पहले यह रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह युवाओं में भी तेजी से फैल रहा है, मानो किसी महामारी की तरह। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना, बैठकर काम करने वाली नौकरियां और जंक फूड जैसे खराब खानपान की आदतें। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
पहले जिसे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था, अब उसका नाम बदलकर मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कर दिया गया है। यह बीमारी अब सिर्फ मोटापे से जूझ रहे लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामान्य या दुबले-पतले लोगों में भी तेजी से फैल रही है।
धीरे-धीरे बढ़ता खतरा
Fatty Liver की शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए यह रोग चुपचाप लिवर में चर्बी जमा करता रहता है। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), सिरोसिस या यहां तक कि लिवर कैंसर जैसे गंभीर रूप ले सकता है। लिवर से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर तब सामने आती हैं जब मरीज को पेट में भारीपन, थकावट या अचानक वजन कम होने जैसे संकेत दिखने लगते हैं।
मोटापा नहीं, दुबले-पतलों को भी खतरा
Fatty Liver अब सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले और दुबले-पतले लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजहों में जेनेटिक कारण, इंसुलिन रेजिस्टेंस और पेट की गहराई में जमा चर्बी शामिल हैं। यह बीमारी केवल शरीर की बनावट से नहीं, बल्कि जीवनशैली और खानपान की आदतों से भी जुड़ी हुई है, इसलिए अब इसके प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद ज़रूरी हो गया है।
खराब डाइट और सुस्त जीवनशैली जिम्मेदार
घंटों तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी Fatty Liver के प्रमुख कारण माने जाते हैं। साथ ही प्रोसेस्ड और जंक फूड का अधिक सेवन भी लिवर में चर्बी जमा करने में योगदान देता है। यदि युवा रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, फाइबर युक्त आहार लें और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं, तो वे इस बीमारी से बच सकते हैं।
मानसिक सेहत पर भी असर
हालिया शोधों से पता चला है कि Fatty Liver न केवल शारीरिक सेहत को प्रभावित करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। जब लिवर की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो इसका प्रभाव मस्तिष्क तक पहुंचता है। इससे पीड़ितों में एकाग्रता की कमी, याददाश्त कमजोर होना, मूड स्विंग्स और नींद से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं।
समय पर जांच है सबसे जरूरी
Fatty Liver की जांच को नियमित हेल्थ चेकअप का हिस्सा बनाना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो जोखिम की श्रेणी में आते हैं। बीमारी को शुरुआत में ही पहचानना और सही इलाज शुरू करना इससे बचाव के लिए बेहद जरूरी कदम है