पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एमजीएनआरईगा को विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 से बदलने के केंद्र सरकार के कदम की निंदा की। जानें क्यों यह गरीबों के रोजगार अधिकार के लिए खतरा है।
पंजाब विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार द्वारा एमजीएनआरईगा को विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 से बदलने के कदम की कड़ी निंदा की। यह प्रस्ताव ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड द्वारा पेश किया गया।
पारित प्रस्ताव में कहा गया कि नई योजना राज्य के गरीब मजदूरों, महिलाओं और बेरोजगार परिवारों से गारंटीकृत रोजगार और मजदूरी का अधिकार छीनती है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालती है।
एमजीएनआरईगा: एक ऐतिहासिक रोजगार कानून
सोंड ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण विकास गारंटी अधिनियम (NRDGA) भारत सरकार द्वारा सितंबर 2005 में लागू किया गया था और 2008-09 में पंजाब के सभी जिलों में इसे लागू किया गया। 2 अक्टूबर 2009 को इसे एमजीएनआरईगा के नाम से जाना गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है।
सोंड ने आगे कहा कि एमजीएनआरईगा एक मांग-आधारित योजना है, जिसके तहत यदि कोई श्रमिक काम मांगता है, तो राज्य और केंद्र सरकार को इसे उपलब्ध कराना या बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य है। यह कानून गरीब, भूमिहीन और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए रोजगार को कानूनी अधिकार के रूप में स्थापित करता है।
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नई योजना की कमजोरियां
हालांकि विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 में 125 दिनों का उल्लेख है, लेकिन यह गारंटी बजट और वित्तीय संसाधनों पर निर्भर है। इसका मतलब है कि रोजगार की उपलब्धता अब मांग पर नहीं बल्कि केंद्रीय बजट आवंटन पर निर्भर होगी।
सोंड ने बताया कि नई योजना में मजदूरी का भुगतान 60:40 के अनुपात में और साप्ताहिक भुगतान अनिवार्य किया गया है, लेकिन व्यवहार में यह राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ डालेगा। यदि बजट सीमाएं पूरी हो जाती हैं, तो मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना प्रशासनिक और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
राजनीतिक बहस और विपक्ष की भूमिका
सोंड ने कहा कि कांग्रेस के लोकसभा सांसद सप्तगिरि शंकर उल्का की अध्यक्षता में हुई संसदीय समिति की बैठक में किसी सदस्य ने नई योजना का विरोध नहीं किया, लेकिन विधानसभा में विपक्ष मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है।
इस अवसर पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक, डॉ. बलबीर सिंह, हरभजन सिंह ईटीओ, विपक्ष नेता प्रताप सिंह बाजवा और कई अन्य विधायकों ने भी अपनी बात रखी।
