पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को ऐलान किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ पंजाब विधानसभा में पास हुआ बिल राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद अब आधिकारिक तौर पर कानून बन गया है। यह पवित्र ग्रंथ की मर्यादा की रक्षा करने के लिए एक ज़रूरी कानूनी कदम है।
Punjab Assembly
पंजाब विधानसभा में ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ पर सियासी घमासान
पंजाब विधानसभा में ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ पर सियासी विवाद तेज। AAP नेता तरनप्रीत सिंह सोंड ने बादल गुट पर निशाना साधते हुए सदन में अनुपस्थिति और पंथिक मुद्दों पर सवाल उठाए।
पंजाब विधानसभा में ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ पेश किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) नेता तरूणप्रीत सिंह सोंड ने विपक्ष, विशेषकर बादल गुट पर तीखा हमला बोला है।
तरनप्रीत सिंह सोंड ने विपक्षी दलों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता वर्षों से पंथ और धार्मिक भावनाओं के नाम पर राजनीति करते आए हैं, वे इस महत्वपूर्ण विधेयक के दौरान सदन में मौजूद नहीं थे। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता करार दिया।
ਅਖੌਤੀ ਪੰਥਕ ਤੇ ਮਸੰਦ ਬਾਦਲ ਧੜੇ ਦੀ ਇੱਕ ਹੋਰ ਸ਼ਰਮਨਾਕ ਹਰਕਤ!
ਜਾਗਤ ਜੋਤ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਸਤਿਕਾਰ (ਸੋਧ) ਬਿਲ 2026 ਦਾ ਬਿਲ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ‘ਚ ਪੇਸ਼ ਹੋਇਆ ਅਤੇ 70 ਸਾਲਾਂ ‘ਚ ਪੰਥ ਦੇ ਨਾਂ ‘ਤੇ ਵੋਟਾਂ ਲੈਂਦੇ ਆਏ ਬਾਦਲ ਧੜੇ ਦੇ ਇਕਲੌਤੇ ਵਿਧਾਇਕ ਨੇ ਹਾਜ਼ਰ ਹੋਣਾ ਵੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਸਮਝਿਆ। ਵੱਡੇ ਸਵਾਲ ਇਹ ਉੱਠਦੇ ਹਨ ਕਿ ਕੀ ਸ਼ਬਦ… pic.twitter.com/7xk3zX3qQR
— AAP Punjab (@AAPPunjab) April 14, 2026
उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के समय विपक्षी नेताओं की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। तरूणप्रीत सिंह सोंड के अनुसार, ऐसे नेताओं की भूमिका और उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
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AAP नेता तरूणप्रीत सिंह सोंड ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने अतीत में पंथिक मुद्दों पर अपनी बात बदलते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी गलतियों को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपने ही रुख से पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से जनता का भरोसा कमजोर होता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और सम्मान जैसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी दलों को मिलकर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
सरकार की ओर से इस विधेयक को धार्मिक सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने वाला कदम बताया गया है। वहीं विपक्ष की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों के बीच यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया है।
पंजाब विधानसभा में ऐतिहासिक फैसला: ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ सर्वसम्मति से पारित
पंजाब विधानसभा ने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ पारित किया। सीएम भगवंत मान ने बेअदबी पर उम्रकैद, भारी जुर्माना व गैर-जमानती सख्त कानून बताया।
16वीं पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आज एक महत्वपूर्ण विधेयक को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026’ को पारित करते हुए राज्य सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रति सम्मान और सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि शबद गुरु हैं, जिनसे हमें सत्य, सेवा और मानवता की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का यह स्पष्ट रुख है कि आस्था और धार्मिक भावनाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ਕੱਲ੍ਹ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਖੇ 16ਵੀਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਦੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਇਜਲਾਸ ਦੌਰਾਨ ਜੁਗੋ-ਜੁਗ ਅਟਲ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੇ ਸਤਿਕਾਰ ਬਾਰੇ ਲਿਆਂਦਾ ਗਿਆ ‘ਜਾਗਤ ਜੋਤਿ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਸਤਿਕਾਰ (ਸੋਧ) ਬਿੱਲ-2026’ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਪਾਸ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।
ਅਸੀਂ ਪਵਿੱਤਰ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਨੂੰ ਸ਼ਬਦ ਗੁਰੂ ਮੰਨਦੇ… pic.twitter.com/EiDtwyCWvW
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 14, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रति किसी भी प्रकार की बेअदबी या अपमान को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज की आस्था और धार्मिक सम्मान को सुरक्षित रखने का दृढ़ संकल्प है।
नए संशोधन बिल के तहत बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें आजीवन कारावास, भारी जुर्माना और गैर-जमानती अपराध जैसी कठोर धाराएँ शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं छोड़ेगा।
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सरकार ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकना और समाज में शांति, एकता और भाईचारे को बनाए रखना भी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब हमेशा से ही गुरुओं की धरती रहा है और यहां धार्मिक सद्भाव सर्वोपरि है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कानून राज्य में आस्था की रक्षा और सामाजिक एकता को और मजबूत करेगा।
पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा संकट पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया
पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता और ऊर्जा संकट पर प्रस्ताव पारित किया। मंत्री लाल चंद कटारुचक और हरजोत सिंह बैंस ने एलपीजी व तेल की कमी और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता जताई।
पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता और इसके कारण भारत में उत्पन्न ऊर्जा संकट को उजागर किया गया। यह प्रस्ताव खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले, वन और वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारुचक ने पेश किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की त्रुटिपूर्ण विदेश नीति ने देश में एलपीजी और तेल की कमी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा की हैं।
मंत्री कटारुचक ने बताया कि ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध हो गया है, जिससे भारत में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि जिस संप्रभुता के लिए उन्होंने संघर्ष किया, उसे वर्तमान केंद्र सरकार की गलत नीतियों ने कमजोर किया है।
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शिक्षा, सूचना और जनसंपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनयिक अलगाव में है और उसका कोई स्थायी मित्र नहीं बचा है। बैंस ने चेतावनी दी कि रूस और ईरान में भारत के तेल क्षेत्र में किए गए निवेश अब गंभीर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि युद्ध और ऊर्जा संकट का असर देश की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है, जिससे कई सामाजिक कार्यक्रम रद्द किए गए हैं और आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्रस्ताव का समर्थन विधानसभा के कई अन्य सदस्यों ने भी किया, जिनमें कैबिनेट मंत्री तरूणप्रीत सिंह सोंड, हरदीप सिंह मुंडियन, और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल, गुरिंदर सिंह गैरी वारिंग, विजय सिंगला समेत अन्य प्रमुख सदस्य शामिल थे।
पंजाब विधानसभा ने इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विदेश नीति में सुधार करने की मांग की है, ताकि देशवासियों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा: कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के अपमानजनक बयानों पर विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए भेजा गया प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के अपमानजनक बयानों पर विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए भेजा। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विधायक ने स्पीकर, मंत्रियों और AAP विधायकों का अपमान किया।
पंजाब विधानसभा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के मामले को विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए भेजने का प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित किया। यह प्रस्ताव राज्य के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पेश किया।
प्रस्ताव में बताया गया कि विधायक खैरा ने हाल ही में अपने अपमानजनक बयानों और असंसदीय व्यवहार से स्पीकर, मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहकर न केवल सदन के निर्वाचित सदस्यों बल्कि संविधान और जनता के जनादेश का अपमान किया।
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मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में कहा कि यह मामला 10 मार्च, 2026 को सोशल मीडिया पर किए गए बयानों से उत्पन्न हुआ। उन्हें 11 मार्च को सदन में स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने का अवसर दिया गया, लेकिन विधायक खैरा ने अपने शब्दों को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके अलावा, विपक्ष के वॉकआउट के दौरान खैरा द्वारा सदन से बाहर निकलते समय किए गए आपत्तिजनक शारीरिक हावभाव की भी कड़ी निंदा की गई।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “इन हरकतों ने संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया है। कुछ विधायक सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने या मनोरंजन के उद्देश्य से संविधान और शपथ का उल्लंघन कर रहे हैं।” उन्होंने सदन से अपील की कि विशेषाधिकार समिति को मामले की गंभीर और व्यापक जांच सौंपी जाए, ताकि विधानसभा की गरिमा और पवित्रता बनी रहे।
यह मामला पंजाब विधानसभा में पेशेवर आचार और संसदीय मर्यादा की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की, माफी न मिलने पर सदस्यता रद्द की मांग
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की महिलाओं और श्रमिकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। माफी न मिलने पर सदस्यता रद्द की मांग।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भोलाथ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा द्वारा सोशल मीडिया पर की गई अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों की तीव्र निंदा की है। उन्होंने कहा कि खैरा को तुरंत और बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। यदि वे सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जानी चाहिए।
सदन में हुई कड़ी प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा में कहा, “सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब की महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। जब मैंने उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई, तो उन्होंने मुझ पर व्यक्तिगत हमला करते हुए मुझे ‘बंदुआ मजदूर’ कहा। यह भाषा पूरी तरह अस्वीकार्य और एक विधायक के लिए अशोभनीय है।”
कांग्रेस पार्टी पर जिम्मेदारी का आरोप
मंत्री ने कांग्रेस पार्टी से भी अपील की कि अपने सदस्य के शर्मनाक आचरण के लिए आधिकारिक माफी मांगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी नेतृत्व को अपने प्रतिनिधि के इस व्यवहार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की कि यदि सुखपाल सिंह खैरा अपनी अपमानजनक भाषा के लिए तुरंत और सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाया जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल व्यक्तिगत सम्मान बल्कि पंजाब के मेहनतकश लोगों की गरिमा की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।
लोकतांत्रिक मूल्यों और श्रमिक वर्ग का समर्थन
अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने साधारण पृष्ठभूमि और मेहनतकश वर्ग की गरिमा का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को सशक्त बनाता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से जनता की सेवा करने का अवसर प्रदान करता है।
राज्य बजट और लोक सेवा पर गर्व
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अपने कार्यों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि उन्हें पंजाब के नागरिकों की भलाई और समृद्धि के लिए प्रस्तुत किए गए पांच व्यापक राज्य बजट पर गर्व है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया।
योग्यताओं की चुनौती
हरपाल सिंह चीमा ने सुखपाल सिंह खैरा को चुनौती दी कि वे अपमानजनक टिप्पणियां करने के बजाय अपनी योग्यताओं का सत्यापन कराएं। उन्होंने कहा कि भोलाथ विधायक का शैक्षणिक और करियर रिकॉर्ड संदिग्ध है और ऐसे व्यक्तियों को जनता के सामने उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान का एसजीपीसी में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग, पंथिक मर्यादा की रक्षा के लिए संगतों को एकजुट होने का आह्वान
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने पंथिक मर्यादा की रक्षा के लिए संगतों को एकजुट होने का आह्वान किया और एसजीपीसी में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग की।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने गुरुवार को संगत और सिख पंथिक समुदायों से पंथिक मर्यादा की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने एसजीपीसी (सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी) में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पंथिक संस्थानों और गुरुओं के गोलकों का राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग अस्वीकार्य है।
संधवान ने कहा कि सिख धर्म के प्रबंधन संस्थान एसजीपीसी वर्षों से सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने कहा, “पंथिक समुदायों की आवाज़ समय-समय पर उठती रही है। हाल ही में ज्ञानी रघुबीर सिंह और भाई रणजीत सिंह के खुलासों ने इन मुद्दों को और भी गंभीर रूप में सामने रखा है। गुरुद्वारों की भूमि, गोलक और प्रबंधन में अनियमितताएं लगातार देखी जा रही हैं, लेकिन सुधार की बजाय शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की जाती रही।”
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उन्होंने विशेष रूप से कहा, “तबादलों, निष्कासनों और मुकदमों का इस्तेमाल मुखबिरों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में पंथ और इसके संस्थानों का राजनीतिक उपयोग करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भूमि घोटाले, लंगर रोटियों से संबंधित अनियमितताएं और 328 स्वरूपों के संवेदनशील मामले अब और नहीं टाले जा सकते।”
संधवान ने वर्तमान स्थिति को निर्णायक क्षण बताते हुए संगतों और पंथिक समुदायों से अपील की कि वे सरबत खालसा की भावना से एकजुट हों। उन्होंने कहा, “यदि पंथ कमजोर होगा, तो समाज कमजोर होगा। गुरुघरों की मर्यादा और संपत्ति की रक्षा के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यह समय पंथिक मर्यादा और संस्थानों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का है।”
संधवान का यह आह्वान पंथिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने भाजपा और अकाली दल पर आरोप लगाया कि नए जी राम जी बिल के जरिए वे गरीब, दलित और महिला मनरेगा मजदूरों के खिलाफ साज़िश कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने भाजपा की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार और शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे नए लाए गए जी राम जी बिल के ज़रिए गरीबों, दलितों और महिला मनरेगा मजदूरों के खिलाफ साज़िश रच रहे हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, धालीवाल ने कहा कि सुधारों के नाम पर यह नया बिल लाकर भाजपा ने गरीबों के मुंह से आखिरी निवाला भी छीन लिया है। यह बिल करोड़ों मनरेगा मजदूरों, खासकर दलितों और पिछड़े वर्गों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने दावा किया कि आप ने पंजाब विधानसभा में इस बिल का कड़ा विरोध किया है और ज़रूरत पड़ी तो सड़कों पर भी संघर्ष करेगी। उन्होंने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार है। हम इस गरीब विरोधी बिल को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे।
अकाली दल के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए धालीवाल ने कहा कि विधानसभा में चर्चा के दौरान अकाली दल का न होना भाजपा के साथ उनके गुप्त गठबंधन को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि जब पंजाब विधानसभा ने भाजपा के इस बिल को खारिज करने का प्रस्ताव पास किया, तो अकाली दल ने नदारद रहना चुना। यह नदारद होना भाजपा के साथ पर्दे के पीछे उनके समझौते का साफ इशारा है।
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उन्होंने इशारा किया कि अकाली दल के दो विधायक पहले ही बादल गुट छोड़ चुके हैं और अब सिर्फ एक विधायक बचा है, जिसकी गैरमौजूदगी ने पार्टी के असली चेहरे को नंगा कर दिया है। धालीवाल ने आगे कहा कि अकाली दल ने चुपचाप इस गरीब विरोधी और दलित विरोधी बिल का सपोर्ट किया है।
पहले के मामलों का ज़िक्र करते हुए धालीवाल ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबज़ादों के बारे में भाजपा के विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर शिरोमणि अकाली दल और शिरोमणि कमेटी की चुप्पी भी उनकी बढ़ती नज़दीकियों को दिखाती है। यह चुप्पी अचानक नहीं, बल्कि जानबूझकर थी।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने चेतावनी दी कि मनरेगा को कमज़ोर करने से लाखों परिवार बेरोज़गार हो जाएँगे, जिसका सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है, जबकि हमारी बहुत सारी माताएँ और बहनें मनरेगा में काम करती हैं। उनसे काम छीनना महिलाओं की आज़ादी पर हमला है।
अकाली दल की निंदा करते हुए धालीवाल ने अंत में कहा कि भाजपा के साथ खड़े होकर अकाली दल ने खुद को पंजाब के गरीबों के ख़िलाफ़ ऐलान कर दिया है। उनकी राजनीति बहुत शर्मनाक लेवल पर गिर गई है।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने VB-G RAM G योजना को महात्मा गांधी की ‘दूसरी हत्या’ करार दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर गरीबों और किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
चंडीगढ़: पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मंगलवार को केंद्र सरकार की VB-G RAM G योजना (विक्षित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) को एक छलपूर्ण योजना बताते हुए इसे महात्मा गांधी की ‘दूसरी हत्या’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गारंटीशुदा रोजगार के सिद्धांतों को नष्ट करने और जनता को गुमराह करने का काम कर रही है।
केंद्र सरकार की रणनीति पर तीखा हमला
पंजाब विधानसभा के 16वें विशेष सत्र में डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “केंद्र सरकार की रणनीति है ‘मुंह में राम राम, बगल में छुरा’। वे गरीब कल्याण की बातें तो करते हैं, लेकिन उनकी नीतियां गरीबों की पीठ में छुरा घोंपने जैसी हैं।”
मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने योजना के नाम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना का भगवान राम से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि असली मर्यादा पुरुषोत्तम ने गरीबों के कल्याण के लिए काम किया था, जबकि यह योजना इसके बिल्कुल विपरीत है।
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मांग-आधारित मॉडल से आपूर्ति-आधारित मॉडल की ओर
डॉ. बलबीर सिंह ने विस्तार से बताया कि केंद्र सरकार ने मांग-आधारित मॉडल से आपूर्ति-आधारित मॉडल की ओर बढ़ते हुए ग्राम सभाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य योजना बनाने और निधि आवंटन में स्वतंत्रता खो दी है।
पंजाब की उपेक्षा और धनराशि का भेदभाव
मंत्री ने पंजाब की जानबूझकर उपेक्षा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई-तीन वर्षों में पंजाब को सामग्री लागत नहीं मिली, जबकि बिहार जैसे चुनावी राज्यों को भारी धनराशि प्रदान की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह धनराशि केवल उन राज्यों को दी जा रही है जहां चुनाव होने वाले हैं।
ऐतिहासिक किसान आंदोलन की तरह जनविरोधी नीतियों का विरोध
अपने भाषण का समापन करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह संघर्ष ऐतिहासिक किसान आंदोलन की तरह है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीज विधेयक और विद्युत संशोधन बिल गरीबों और किसानों को और अधिक प्रभावित करेंगे, और जनता को इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खड़ा होना होगा।
पंजाब विधानसभा ने तीन महत्वपूर्ण राजस्व संशोधन विधेयक सर्वसम्मति से पारित किए। हरदीप सिंह मुंडियन ने बताया कि ये कदम व्यवसाय सुगमता, स्वामित्व अधिकार और डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करेंगे।
पंजाब विधानसभा ने आज विशेष सत्र में राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन द्वारा प्रस्तुत तीन प्रमुख राजस्व संशोधन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित किया। इन विधेयकों का उद्देश्य व्यवसाय में आसानी, स्वामित्व अधिकारों की तेजी और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करना है।
1. भारतीय स्टाम्प (पंजाब द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025
मुंडियन ने बताया कि इस संशोधन से स्वामित्व विलेख जमा करने, बंधक रखने और समतागत बंधक से संबंधित स्टाम्प शुल्क को युक्तिसंगत बनाया गया है। अब एक ही ऋण लेनदेन पर एक बार शुल्क लगेगा और शुल्क की उच्चतम सीमा निर्धारित की जाएगी। इससे लेनदेन लागत कम होगी और लघु एवं मध्यम उद्यमों को लाभ मिलेगा।
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2. पंजाब आबादी देह (अधिकार अभिलेख) संशोधन विधेयक, 2025
मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से “मेरा घर मेरे नाम” योजना के तहत आपत्तियों और अपीलों की समयसीमा कम की गई है। इसका उद्देश्य आबादी देह क्षेत्रों के निवासियों को स्वामित्व अधिकार जल्दी सुनिश्चित करना है, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।
3. पंजाब भूमि राजस्व (संशोधन) विधेयक, 2025
मुंडियन ने बताया कि भूमि राजस्व अधिनियम, 1887 में संशोधन के बाद राजस्व अधिकारियों के समक्ष मामलों का निपटारा तेज होगा। गैर-वादी पक्षों को अनावश्यक तलब से बचाया जाएगा और डिजिटल अभिलेख एवं डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता मिलेगी। यह कदम नागरिकों की कठिनाइयों को कम करेगा और पूरे राज्य में डिजिटल अभिलेख प्रणाली को मजबूत करेगा।