उत्तर प्रदेश अब निवेश और औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। राज्य में किए गए नीतिगत और विनियामक सुधारों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसका ताजा उदाहरण अशोक लीलैंड का नया प्लांट है, जिसमें लगभग 252 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस परियोजना का ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह 20 फरवरी 2024 को आयोजित किया गया था, और इतने कम समय में इसका धरातल पर आ जाना यह दिखाता है कि अब निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं है बल्कि उत्पादन और रोजगार में परिवर्तित हो रहा है। इस प्लांट से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में निवेश की यह सफलता किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं है। 2018 में आयोजित उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को 4.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इसके बाद 2023 में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में नए रिकॉर्ड के साथ लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश आशय पत्र मिले। कुल मिलाकर 9 वर्षों में 45 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित हुआ, जिसे अब चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से धरातल पर उतारा जा रहा है।
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अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से अधिक परियोजनाओं के लिए ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 8,300 परियोजनाएं 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ वाणिज्यिक संचालन के चरण में हैं, जबकि लगभग 8,100 परियोजनाएं 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ क्रियान्वयनाधीन हैं। योगी सरकार जीबीसी 5 के माध्यम से अगले चरण में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को जल्द ही जमीन पर उतारने जा रही है। यह सब दिखाता है कि निवेश केवल कागजों पर नहीं, बल्कि उद्योग, उत्पादन और रोजगार में बदल रहा है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IPI) भी राज्य की प्रगति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मार्च 2025 तक विनिर्माण का सूचकांक 167.97 और सामान्य सूचकांक 157.73 दर्ज किया गया। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। अशोक लीलैंड का नया प्लांट इस विकास यात्रा का मजबूत प्रतीक है और यह साबित करता है कि राज्य में निवेश के लिए नीतियां तो हैं ही, साथ ही क्रियान्वयन और उद्योग-अनुकूल वातावरण भी मजबूत है।
तेज अनुमतियां, सिंगल विंडो सिस्टम, उद्योग-अनुकूल नीतियां और बुनियादी ढांचे का विकास निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश अब बड़े निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है।