पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ अमृत महोत्सव में कहा कि कोई भी शक्ति भारत को दबाव में झुका नहीं सकती। उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षणों और भारत की अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के दौरान भारत की शक्ति और संप्रभुता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को दबाव में झुकने या आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
पोखरण परमाणु परीक्षण का किया जिक्र
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 1998 के पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए भारत की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपने निर्णय पर अडिग रहा और देश ने अपनी क्षमता का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि 11 मई और 13 मई 1998 को किए गए परमाणु परीक्षण भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं।
A thousand years ago, the first of many attacks on Somnath took place. Those who kept engaging in such attacks believed they could shatter the ethos of our land. But, they were wrong. Thanks to fiercely courageous children of Bharat Mata, Somnath kept getting rebuilt.… pic.twitter.com/dN6qGEN4c9
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
“देश सर्वोपरि है” की भावना पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया था कि देश सर्वोपरि है और कोई भी बाहरी दबाव भारत की नीतियों को प्रभावित नहीं कर सकता। उन्होंने इसे भारत की “अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति” का उदाहरण बताया।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को भारत की स्वतंत्रता के बाद की राष्ट्रीय चेतना से जोड़ते हुए कहा कि 1951 में इसका पुनः उद्घाटन एक नई शुरुआत का प्रतीक था। उन्होंने इसे “स्वतंत्र भारत की जागृत चेतना” करार दिया।
अनुष्ठान और सांस्कृतिक आयोजन
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मंदिर में महा पूजा, जलाभिषेक और कुंभाभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। उन्होंने भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण टीम के हवाई प्रदर्शन को भी देखा। इसके साथ ही इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्का भी जारी किया गया, जो सोमनाथ मंदिर के 75 वर्षों की पुनर्निर्माण यात्रा को दर्शाता है।
राजनीतिक संदर्भ भी आया सामने
अपने भाषण में पीएम मोदी ने स्वतंत्रता के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर हुए विरोध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि भारत की आस्था और विकास यात्रा को कभी रोका नहीं जा सका।