आम आदमी पार्टी के किसान नेता सागर रबारी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि गेहूं का MSP ₹2,585 होने के बावजूद खरीद नहीं हो रही। किसानों को प्रति क्विंटल ₹300-585 का नुकसान, व्यापारी चुनाव फंड इकट्ठा कर सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश महामंत्री और किसान नेता सागर रबारी ने वीडियो माध्यम से बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,585 घोषित किया था। यानी 20 किलो के एक मण के साधारण गणित में समझें तो भारत सरकार ने ₹517 प्रति मण का भाव देने की घोषणा की थी। किसानों को वर्तमान में बाजार भाव ₹400 से ₹450 रुपये प्रति मण मिल रहा है, यानी ₹2,000 से लेकर ₹2,250 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। भारत सरकार द्वारा घोषित ₹2,585 के भाव की तुलना करें तो किसानों को प्रति क्विंटल ₹300 से लेकर ₹585 रुपये का नुकसान हो रहा है। गुजरात में इस वर्ष गेहूं के बुवाई में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल गेहूं की बुवाई 12,77,112 हेक्टेयर में सिंचित गेहूं और 26,061 हेक्टेयर में असिंचित गेहूं हुए है। इस प्रकार कुल बुवाई 13,03,172 हेक्टेयर में हुई है।
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जिला अनुसार आंकड़े एग्रीकल्चर डायरेक्टर की वेबसाइट के माध्यम से देखें तो सबसे अधिक बुवाई राजकोट जिले में 1,32,100 हेक्टेयर में हुई है, जूनागढ़ जिले में 1,25,900 हेक्टेयर में हुई है और अहमदाबाद जिले में 1,20,400 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। किसानों को प्रति क्विंटल ₹300 से ₹585 रुपये तक का नुकसान कराने के पीछे भाजपा का इरादा क्या है? क्या आने वाली स्थानीय स्वराज के चुनाव में व्यापारियों से चुनाव फंड इकट्ठा करने के लिए यह स्थिति बनाई जा रही है? किसानों का शोषण करके व्यापारियों के माध्यम से किसानों को ही गांठिया-भजिया खिलाने के लिए यह पैसा इकट्ठा किया जा रहा है? सरकार ने 4 मार्च से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन आज 19 मार्च तक एक भी खरीद केंद्र कहीं शुरू नहीं हुआ है। बीच के 15 दिन बीत चुके हैं।
AAP नेता सागर रबारी ने आगे कहा कि क्या इस बीच का समय चुनाव फंड इकट्ठा करने के लिए व्यापारियों को दिया जा रहा है? व्यापारी खेत-खेत जाकर या बाजार में आने वाले गेहूं को सस्ते दाम पर खरीद लें और बाद में वही गेहूं किसी के सहारे ऊंचे दाम पर बेचकर कुछ व्यापारी, दलाल और भाजपा चुनाव फंड इकट्ठा तो नहीं कर रहे हैं? और यदि चुनाव फंड इकट्ठा नहीं किया जा रहा है, तो कल से ही खरीद केंद्र शुरू करें, ताकि किसानों को इस महंगाई में नुकसान उठाकर अपनी मेहनत की कमाई सस्ते में बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।