Breast Cancer in Young Women: युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जानें इसके प्रमुख कारण, जोखिम कारक और शुरुआती लक्षण जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
Breast Cancer in Young Women: ब्रेस्ट कैंसर को लंबे समय तक केवल उम्रदराज महिलाओं की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। हाल के वर्षों में युवा महिलाओं में भी इसके मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता बन गई है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक में ब्रेस्ट कैंसर की दर में लगभग 1.4% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की तुलना में अधिक है।
युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने के कारण
1. लाइफस्टाइल और शराब का सेवन
विशेषज्ञों के अनुसार, शराब का अधिक सेवन शरीर में हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
2. मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली
शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता मोटापा हार्मोन असंतुलन और सूजन को बढ़ाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े प्रमुख जोखिम कारक हैं।
3. जेनेटिक कारण
कुछ मामलों में BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकते हैं, हालांकि अधिकांश मामले गैर-आनुवांशिक होते हैं।
4. पर्यावरणीय प्रभाव
प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक जैसे पर्यावरणीय कारक भी संभावित जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल माने जा रहे हैं, हालांकि इस पर अभी शोध जारी है।
5. स्क्रीनिंग और जागरूकता की कमी
भारत में नियमित स्क्रीनिंग की कमी और यह धारणा कि युवा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता, अक्सर बीमारी की पहचान में देरी का कारण बनती है।
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है:
- ब्रेस्ट में बिना दर्द वाली गांठ
- स्किन में बदलाव या डिम्पलिंग
- निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज या रक्त
- ब्रेस्ट के आकार या बनावट में बदलाव
- लगातार हल्की असहजता या थकान
इन संकेतों को अक्सर सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
युवतियों में पहचान क्यों होती है मुश्किल?
युवा महिलाओं में ब्रेस्ट टिश्यू अधिक घना होता है, जिससे शुरुआती बदलावों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव को भी कई बार सामान्य समस्या समझ लिया जाता है।
सामाजिक झिझक और जागरूकता की कमी भी समय पर जांच न कराने का बड़ा कारण बनती है।