Bone Density एक धीमी लेकिन गंभीर समस्या है। अगर समय पर इसके लक्षणों को पहचानकर जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव किए जाएं, तो हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है। इसलिए शरीर द्वारा दिए जा रहे संकेतों को अनदेखा न करें और ज़रूरत महसूस हो तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर की हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। यह समस्या विशेष रूप से बुजुर्गों में अधिक देखी जाती है, लेकिन आजकल कुछ युवाओं में भी हड्डियों के कमजोर होने की शिकायत सामने आ रही है। इसका एक प्रमुख कारण है अस्थि घनत्व यानी Bone Density में कमी।
Bone Density हड्डियों में मौजूद खनिजों की मात्रा को मापने का एक तरीका है, जो यह बताता है कि हड्डियां कितनी मजबूत हैं। जब यह घनत्व घटने लगता है, तो हड्डियां नाजुक हो जाती हैं और मामूली चोट से भी टूटने लगती हैं।
हालांकि यह समस्या उम्र बढ़ने पर आम है, लेकिन आजकल की खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के चलते युवाओं में भी यह देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं डॉक्टर से कि आखिर बोन डेंसिटी में गिरावट क्यों आती है और इसके लक्षण क्या होते हैं।
बोन डेंसिटी क्या है?
Bone Density यानी अस्थि घनत्व हड्डियों की मजबूती को दर्शाता है। इसमें यह आंका जाता है कि हड्डियों में कैल्शियम और अन्य खनिजों की कितनी मात्रा मौजूद है। जब ये खनिज घटने लगते हैं, तो हड्डियां कमजोर होकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकती हैं।
Bone Density घटने के मुख्य कारण
हड्डियों की सघनता में गिरावट के पीछे कई वजहें हो सकती हैं:
- उम्र बढ़ना: 30 की उम्र के बाद हड्डियों का घनत्व धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।
- कैल्शियम और विटामिन D की कमी: यदि शरीर को पर्याप्त मात्रा में ये पोषक तत्व नहीं मिलते, तो हड्डियों की मजबूती घटने लगती है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी: नियमित रूप से न चलना-फिरना या व्यायाम न करना बोन लॉस की आशंका बढ़ा सकता है।
- धूम्रपान और शराब: ये दोनों आदतें हड्डियों की संरचना पर बुरा असर डालती हैं और उन्हें जल्दी कमजोर कर सकती हैं।
- हार्मोनल बदलाव: महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी, खासकर मेनोपॉज के बाद, बोन डेंसिटी को तेज़ी से घटा सकती है।
- कुछ दवाइयों का असर: लंबे समय तक स्टेरॉइड जैसी दवाएं लेने से भी हड्डियों को नुकसान पहुंचता है।
कम Bone Density के संकेत
- कमर या पीठ में लगातार दर्द: स्पाइन पर दबाव बढ़ने से यह दर्द बना रह सकता है।
- बार-बार फ्रैक्चर: मामूली गिरावट में भी हड्डियों का टूटना चेतावनी का संकेत हो सकता है।
- कद में कमी: स्पाइन के सिकुड़ने के कारण व्यक्ति की लंबाई कम हो सकती है।
- पोश्चर में बदलाव: शरीर झुककर चलने लगता है।
- हड्डियों में कमजोरी या भारीपन महसूस होना: बिना थकावट के भी शरीर कमजोर या थका हुआ लगता है।
हड्डियों को मजबूत कैसे रखें?
- अपने आहार में कैल्शियम और विटामिन D युक्त चीजें जैसे दूध, दही, पनीर, मछली, अंडा, बादाम और धूप को शामिल करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज करें – जैसे चलना, योग या हल्की वेट ट्रेनिंग।
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
- अगर परिवार में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं रही हों, तो नियमित रूप से बोन डेंसिटी की जांच करवाते रहें।
समय रहते सतर्कता बरतकर और जीवनशैली में बदलाव लाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है।