पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मंगलवार को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार और उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण, डिजिटल सुधार, बुनियादी ढांचे के उन्नयन और जिलों में निगरानी तंत्र को मजबूत करना था।
डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पंजाब में वर्तमान में 881 आम आदमी क्लीनिक कार्यरत हैं और इसमें लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने गर्भवती महिलाओं की संख्या में लगभग 30% की वृद्धि दर्ज की गई है और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान 29% तक पहुंच गई है, जिससे समय पर चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित हो रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि 243 नए आम आदमी क्लीनिक निर्माणाधीन हैं, जबकि 308 उप स्वास्थ्य केंद्रों को आम आदमी क्लीनिक में परिवर्तित किया जा रहा है। इन क्लीनिकों में नवजात शिशु एवं बाल चिकित्सा देखभाल, नियमित टीकाकरण और कैंसर जांच जैसी सेवाएं भी शामिल होंगी। उन्होंने ब्लॉक स्तर के संस्थानों को मजबूत करने और “कम रेफर करें, अधिक इलाज करें” के सिद्धांत को अपनाने पर जोर दिया।
डॉ. बलबीर सिंह ने दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि 14 जिलों में आम आदमी क्लीनिकों में 102 आवश्यक दवाओं में से कम से कम 97 दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले प्रत्येक मरीज को निःशुल्क दवा और निदान सेवाएं मिलनी चाहिए और स्टॉक की कमी के लिए जवाबदेही तय होगी।
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मुख्यमंत्री सेहत योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है और आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है। सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया कि मरीजों का नामांकन सुचारू रूप से हो और सेवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में MedlyAppR प्रणाली की प्रगति और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और गहन चिकित्सा ब्लॉकों पर प्रगति की समीक्षा भी की गई। मंत्री ने मातृ मृत्यु दर में कमी, नवजात शिशु उत्तरजीविता, टीकाकरण अभियान और तपेदिक के पता लगाने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य मंत्री ने STEMI और स्ट्रोक प्रोजेक्ट्स, गैर-संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग और कैंसर की जल्दी पहचान जैसे उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने नशा-विरोधी अभियान “युद्ध नशीयन विरुद्ध 2.0” का ज़िक्र करते हुए बताया कि प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में क्लस्टर रिसोर्स सेंटर उपचार और पुनर्वास में सहयोग कर रहे हैं।
डॉ. बलबीर सिंह ने जिला प्रमुखों और सिविल सर्जनों से परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने, स्वास्थ्य सुविधाओं का अचानक निरीक्षण करने और मरीजों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने का आह्वान किया।