कुलदीप सिंह धालीवाल ने ‘सतलुज’ फिल्म पर रोक की मांग को पंजाब के इतिहास और सच को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक आरोप लगाए।
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की आगामी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रहे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं और इसके माध्यम से पंजाब के इतिहास से जुड़े संवेदनशील तथ्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचने से रोका जा रहा है।
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धालीवाल ने कहा कि बादल परिवार, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी मिलकर पंजाब के इतिहास से जुड़े उन अध्यायों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनका संबंध वर्ष 1984 से 1995 के बीच के घटनाक्रम से है। उनका कहना था कि यह केवल एक फिल्म का मामला नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास और समाज से जुड़े तथ्यों को सामने आने से रोकने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में फिल्मों, साहित्य और कला के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। किसी भी फिल्म पर रोक लगाने के बजाय लोगों को उसे देखने और अपनी राय बनाने का अधिकार मिलना चाहिए।
ਦਿਲਜੀਤ ਦੋਸਾਂਝ ਦੀ ਸੱਚਾਈ ਨਾਲ ਭਰੀ ‘ਸਤਲੁਜ’ ਫ਼ਿਲਮ ਨੂੰ ਬੈਨ ਕਰਕੇ ਬਾਦਲ ਪਰਿਵਾਰ, ਕਾਂਗਰਸ ਅਤੇ ਬੀਜੇਪੀ ਮਿਲ ਕੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਨੂੰ ਦਬਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ। 1984 ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ 1995 ਤੱਕ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੇ ਕਤਲੇਆਮ ਨੂੰ ਨਵੀਂ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੋਂ ਛੁਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ।
दिलजीत दोसांझ की सच्चाई से भरी ‘सतलुज’ फिल्म को बैन करके बादल… pic.twitter.com/054go9byxV
— Kuldeep Singh Dhaliwal (@KuldeepSinghAAP) July 6, 2026
धालीवाल ने कहा कि नई पीढ़ी को पंजाब के इतिहास, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों की सही जानकारी मिलनी चाहिए। इतिहास को छिपाने के बजाय तथ्यों के आधार पर उसे समझने और उस पर खुली चर्चा करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक हितों के लिए इस मुद्दे को विवाद का रूप दे रहे हैं। उनके अनुसार, जनता को ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को निष्पक्ष रूप से देखने का अवसर मिलना चाहिए।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक तथ्यों पर खुली चर्चा का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास को दबाने के बजाय उसे सही संदर्भ में समझना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।