AAP नेता सागर रबारी ने कहा कि भारतीय किसान संघ ने गुजरात के किसानों के साथ विश्वासघात किया, किसानों के मुद्दों पर मौन रहा और शक्ति प्रदर्शन स्थगित किया।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश महामंत्री सागर रबारी ने कहा कि भारतीय किसान संघ ने किसानों के मुद्दों पर 12 जनवरी को शक्ति प्रदर्शन की घोषणा की थी। उसी समय मैंने आशंका जताई थी कि भारतीय किसान संघ किसानों को गुमराह करेगा। आज खबर आई है कि प्रधानमंत्री के आने के कारण यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है, लेकिन इसकी कोई नई तारीख भी घोषित नहीं की गई है।यह बदलाव उनकी बृहद कारोबारी ने किया है। आर. के. पटेल कहते हैं कि वारिसों को कोई स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी और मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। अगर मंत्रियों के साथ बैठक हुई है तो उसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? किसानों की ओर से कौन-कौन गया था? कच्छ में अडाणी की पावर लाइन बिछाने के मुद्दे पर किसानों के साथ जो अन्याय हो रहा है और पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है, उसी से इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हुई थी। जब सामखयाली हाइवे को किसानों ने ब्लॉक किया, तब इस शक्ति प्रदर्शन की बात सामने आई। एक ओर हाई टेंशन लाइनों के कारण किसानों को हो रहा अन्याय, दूसरी ओर कड़दा कांड—जब चारों तरफ से किसानों के मुद्दे उबल रहे थे, तब उन्हें ठंडा करने के लिए भारतीय किसान संघ मैदान में उतरा। यदि आप देखें तो भारतीय किसान संघ का ट्रैक रिकॉर्ड यही रहा है।
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AAP नेता सागर रबारी ने आगे कहा कि भारतीय किसान संघ आरएसएस प्रेरित और भाजपा की सहयोगी संस्था है। जब भाजपा सत्ता में नहीं थी, तब भारतीय किसान संघ लाखों किसानों के सम्मेलन करता था। भाजपा के सत्ता में आने के बाद से भारतीय किसान संघ सिर्फ जैविक खेती की बातें करता है। चाहे हाइवे के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला हो, SIR में सीधे-सीधे किसानों की जमीन कटौती का मुद्दा हो, किसानों के दाम का सवाल हो, कड़दा कांड हो, उद्योगपतियों के लाभ के लिए डाली जा रही हाई टेंशन लाइनों का विषय हो या सिंचाई के पानी का सवाल—किसानों के साथ हो रहे अन्याय पर भारतीय किसान संघ हमेशा मौन रहता है। जब भाजपा सरकार दबाव में आती है, तब उसे बाहर निकालने का रास्ता देने के लिए शक्ति प्रदर्शन की घोषणा की जाती है। भारतीय किसान संघ ने एक बार फिर गुजरात के किसानों के साथ विश्वासघात किया है। भारतीय किसान संघ चाहे पानी में बैठकर घोषणाएं करता रहे, लेकिन हम किसानों के मुद्दों पर लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यदि कड़दा प्रथा, भूमि अधिग्रहण या हाई टेंशन लाइन के मुद्दों पर भारतीय किसान संघ सरकार के मंत्रियों से ठोस घोषणा नहीं करवा पाता, तो आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी इन मुद्दों को लेकर गुजरात के गांव-गांव जाएगी और किसानों को संगठित करेगी। गांधीनगर में जोरदार शक्ति प्रदर्शन कर किसानों के सवालों का समाधान लाया जाएगा।