Wednesday, July 22, 2026

सूर्य ग्रहण 2026: 12 अगस्त को लगेगा वलयाकार सूर्य ग्रहण, हरियाली अमावस्या पर बनेगा खास संयोग

by Neha
सूर्य ग्रहण 2026: 12 अगस्त को लगेगा वलयाकार सूर्य ग्रहण, हरियाली अमावस्या पर बनेगा खास संयोग

सूर्य ग्रहण 2026: 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जो भारत में दिखाई नहीं देगा। जानें पूरी डिटेल और प्रभाव।

सूर्य ग्रहण 2026: साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में देखा गया था।

सूर्य ग्रहण का समय और स्वरूप

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात करीब 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक चलेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे लंबे समय तक चलने वाला ग्रहण माना जा रहा है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाएंगे, जिससे सूर्य रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई देगा।

किन देशों में दिखेगा सूर्य ग्रहण?

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि उस समय यहां रात होगी। हालांकि दुनिया के कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। वहीं यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कई क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण देखा जा सकेगा।

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ज्योतिषीय महत्व और राशि प्रभाव

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा। इस समय सूर्य कर्क राशि में रहेंगे और देवगुरु बृहस्पति भी उसी राशि में मौजूद होंगे। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा माने जाते हैं और इस दौरान अश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।

भारत में सूतक काल मान्य नहीं

चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। आमतौर पर सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन इस स्थिति में भारत में इसका प्रभाव लागू नहीं होगा।

संभावित प्रभाव और मान्यताएं

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय विश्व स्तर पर कई बदलाव और घटनाओं की संभावना जताई जाती है। इसमें प्राकृतिक घटनाओं, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव जैसी स्थितियां शामिल मानी जाती हैं। हालांकि ये सभी मान्यताएं ज्योतिषीय दृष्टिकोण पर आधारित हैं और वैज्ञानिक रूप से इनकी पुष्टि नहीं होती।

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