Sarcopenia Symptoms: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है मांसपेशियों का धीरे-धीरे कमजोर होना। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, 30 साल की उम्र के बाद हर साल लगभग 1% मांसपेशियां कम होने लगती हैं। इस स्थिति को सारकोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है, जिसमें स्केलेटल मसल की ताकत, आकार और कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटती है।
सारकोपेनिया कब शुरू होती है?
अध्ययनों के अनुसार, यह समस्या आम तौर पर 30 साल की उम्र के आसपास शुरू होती है और 60 साल के बाद तेजी से बढ़ सकती है। इसका असर केवल शरीर के आकार पर नहीं बल्कि रोजमर्रा के काम, संतुलन और हड्डियों की मजबूती पर भी पड़ता है। गिरने और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
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महिलाओं में सारकोपेनिया
महिलाओं में 35-40 साल की उम्र के बीच मांसपेशियों की कमी तेजी से होती है। एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट के कारण मसल ब्रेकडाउन बढ़ता है। पेरिमेनोपॉज में महिलाएं वजन समान रहते हुए भी कमजोरी और थकान महसूस कर सकती हैं।
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सारकोपेनिया के लक्षण (Sarcopenia Symptoms)
सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना
मांसपेशियों का टोन कम होना
सामान्य से अधिक थकान महसूस होना
मांसपेशियों को मजबूत कैसे रखें?
रेजिस्टेंस ट्रेनिंग – वजन उठाने या बैंड एक्सरसाइज से मसल स्ट्रेंथ बढ़ती है।
प्रोटीन का सेवन – रोजाना 1.2-1.6 ग्राम प्रति किलोग्राम प्रोटीन लें।
सक्रिय जीवनशैली – तेज चलना या नियमित व्यायाम।
सही नींद – पर्याप्त नींद मसल रिकवरी के लिए जरूरी।
विटामिन D – हड्डियों और मांसपेशियों की हेल्थ के लिए पर्याप्त स्तर बनाए रखें।
सारकोपेनिया केवल उम्र का हिस्सा नहीं, बल्कि इसे सही पोषण और एक्सरसाइज से रोका और नियंत्रित किया जा सकता है।