Friday, July 24, 2026

बड़ी खबर: ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने किया संन्यास का ऐलान

by Neha
बड़ी खबर: ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने किया संन्यास का ऐलान

ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने बैडमिंटन से संन्यास का ऐलान किया। जानें उनके करियर की उपलब्धियां, चोटों का असर और यादगार जीतें।

भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। साइना ने कहा कि उनका शरीर अब उच्चस्तरीय बैडमिंटन की मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण उन्होंने इस निर्णय पर पहुँचने का फैसला किया।

साइना ने अपने अंतिम प्रतिस्पर्धी मैच 2023 सिंगापुर ओपन में खेला था। उन्होंने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया, “मैंने दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था। मैंने सोचा कि अगर मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया है, तो विदाई भी अपनी शर्तों पर होनी चाहिए। अगर आप और खेलने में सक्षम नहीं हैं तो कोई बात नहीं।”

करियर पर चोटों का असर

साइना के करियर में रियो 2016 ओलंपिक में घुटने की गंभीर चोट ने उन्हें चुनौतीपूर्ण दौर में डाल दिया। हालांकि, उन्होंने 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की। लेकिन लगातार घुटनों की समस्याओं ने उन्हें शीर्ष स्तर पर खेलना मुश्किल बना दिया।

2024 में साइना ने खुलासा किया कि उन्हें घुटनों में आर्थराइटिस है और कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है, जिससे शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया।

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साइना नेहवाल की उपलब्धियां

  • ओलंपिक कांस्य पदक (2012 लंदन): पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता।

  • विश्व नंबर 1 रैंकिंग (अप्रैल 2015): पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी जो विश्व नंबर 1 बनीं।

  • विश्व चैंपियनशिप मेडल: 2015 में सिल्वर और 2017 में ब्रॉन्ज मेडल।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड: 2010 दिल्ली और 2018 गोल्ड कोस्ट में महिला सिंगल्स में स्वर्ण पदक।

  • BWF सुपर सीरीज टाइटल्स: इंडोनेशिया ओपन, हांगकांग ओपन, ऑस्ट्रेलिया ओपन सहित कई प्रमुख टूर्नामेंट जीत।

  • वर्ल्ड जूनियर चैंपियन: 2008 में वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रचा।

  • सम्मान: खेल रत्न (2009), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) से सम्मानित।

साइना नेहवाल की यह विदाई भारतीय बैडमिंटन के लिए एक युग का अंत है। उनकी उपलब्धियां और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

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